देश की पहली ट्रेन जिसमें भगवान शिव हुए विराजमान, किन मायनों में यह ट्रेन है खास

विभव देव शुक्ला

धर्म हमारे देश के लिए हमेशा से संवेदनशील मसला रहा है और संवेदनशील से ज़्यादा अहम रहा है। यह हर क्षेत्र में नज़र भी आता है, राजनीति और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में धर्म का दखल नज़र आना नया नहीं है। लेकिन हाल ही में धर्म का प्रभाव ऐसी जगह नज़र आया जहाँ की कल्पना करना किसी के लिए भी आसान नहीं है। रेलवे स्टेशन के आस-पास मंदिर और मस्जिदों की मौजूदगी हमारे लिए बिलकुल नई बात नहीं है। लेकिन यहाँ उससे एक कदम आगे बढ़ कर ट्रेन के भीतर ईश्वर की स्थापना हुई है।

बी5 में सीट संख्या 64
मध्य प्रदेश के इंदौर से उत्तर प्रदेश के वाराणसी के बीच चलने वाली काशी महाकाल एक्सप्रेस के कोच में एक मंदिर बनाया गया है। जिसमें भगवान शिव की स्थापना भी हुई है। ट्रेन के कोच बी5 की सीट संख्या 64 पर शिव मंदिर बनाया गया है। ट्रेन की शुरुआत 20 फरवरी से होनी है। इस ट्रेन के भीतर तमाम खास बातें भी हैं जिसकी वजह से यह काफी चर्चा में है। आईआरसीटीसी के चीफ रीज़नल मैनेजर आश्विनी श्रीवास्तव ने ट्रेन से जुड़ी कई खास बातें बताईं।

किन मामलों में होगी खास
उन्होंने बताया काशी महाकाल एक्स्प्रेस के सभी कोच में सुरक्षा के लिहाज़ से कुल 6 सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे। इतना ही नहीं इन्हें नियंत्रित करने के लिए हर कोच में एक बेस बनाया जाएगा और इन कैमरों की मदद से आईआरसीटीसी के पास लगभग 6 महीने की फुटेज उपलब्ध होगी। इसके अलावा ट्रेन में सफर करने वाले हर यात्री को मुफ्त में 10 लाख रुपए का बीमा दिया जाएगा।
ट्रेन में टिकट लेने के लिए हर उस स्टेशन पर आरक्षण काउंटर भी खोले जाएंगे। इस ट्रेन की सीट को ऐसा बनाया गया है जिससे यात्रियों को यात्रा के दौरान पीठ दर्द की शिकायत न हो, साइड लोवर बर्थ को एक साइड सपोर्ट से जोड़ा जाएगा। साथ ही ट्रेन के हर कोच में कुल 6-6 चार्जिंग पॉइंट भी दिए जाएंगे।

ट्वीट कर जताई आपत्ति
लेकिन धर्म से जुड़े इतने अहम कदम पर विवाद न हो ऐसा लगभग नामुमकिन है। दो बड़े धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाली इस ट्रेन के भीतर हुई भगवान शिव की स्थापना पर फिलहाल राजनीति भी शुरू हो चुकी है। एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने मुद्दे पर बयान दिया है। ओवैसी ने अपने आधिकारिक ट्वीटर एकाउंट पर एक ट्वीट किया है, ट्वीट में उन्होंने भारत के संविधान की प्रस्तावना साझा की है।
संविधान साझा करने का सीधा इशारा है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतान्त्रिक गणराज्य है। भारतीय रेलवे का यह कदम सबसे पहले संविधान की प्रस्तावना की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। ओवैसी ने अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी टैग किया है। दरअसल रविवार के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी। फिलहाल इस ट्वीट को लेकर काफी विवाद हो रहा है।

कितने शहर पैकेज में शामिल
इस ट्रेन के ज़रिये आप उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, इंदौर व भोपाल घूम सकते हैं। आईआरसीटीसी ने इस ट्रेन से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए खास पैकेज भी बनाए हैं। पैकेज में उज्जैन और इंदौर से आने वाले लोगों को वाराणसी, काशी, अयोध्या और प्रयागराज घूमने का मौका मिलेगा। वहीं लखनऊ, प्रयागराज और वाराणसी से यात्रा करने वाले लोगों के लिए अलग पैकेज हैं।
उज्जैन-ओंकारेश्वर जाने वालों को दो रात तीन दिन के 9420 रुपये के पैकेज में महाकालेश्वर ज्योर्तिलिंग मंदिर, कालभैरव मंदिर, राममंदिर घाट, हरसिद्धि मंदिर और ओंकारेश्वर ज्योर्तिलिंग के दर्शन करवाए जाएंगे। वहीं 12,450 रुपये के तीन रात व चार दिनो के पैकेज में उज्जैन-ओंकारेश्वर-महेश्वर-इंदौर का भ्रमण करवाया जाएगा। इसमें इंदौर, महेश्वर में होल्कर किला, नर्मदा घाट व शिव मंदिर को भी जोड़ा जाएगा। इसके अलावा 14,950 रुपये में भोपाल, सांची, भीमवेट का-उज्जैन का भ्रमण करवाया जाएगा। यह पैकेज तीन रातों व चार दिनों का होगा।

क्या होगी पैकेज की राशि
उज्जैन या इंदौर से आने वाले यात्रियों को 6,010 रुपये के एक रात व दो दिन के पैकेज में वाराणसी के घाट, काशी विश्वनाथ मंदिर, संकटमोचन मंदिर और दशाश्वमेघ घाट पर गंगा आरती के दर्शन करवाए जाएंगे। 10,050 रुपये प्रति यात्री के हिसाब से दो रात, तीन दिनों के पैकेज में वाराणसी के घाट, काशी विश्वनाथ मंदिर, संकट मोचन मंदिर और दशाश्वमेघ घाट पर गंगा आरती, सारनाथ, प्रयाग में संगम व हनुमान जी के दर्शन करवाए जाएंगे।
इनके अलावा उज्जैन व इंदौर से आने वालों को 14,770 रुपये में तीन रात, चार दिन के पैकेज में वाराणसी के घाट, काशी विश्वनाथ मंदिर, संकट मोचन मंदिर और दशाश्वमेघ घाट पर गंगा आरती, सारनाथ, अयोध्या में श्रीराम मंदिर, हनुमानगढ़ी, शृंगवेरपुर के साथ ही प्रयाग में संगम व हनुमान जी के दर्शन करवाए जाएंगे।

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