यूपी सरकार ने दिखाई थी उपद्रवियों पर सख्ती और अब अदालत ने सुनाया सरकार पर फरमान

दरअसल उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उन उपद्रवियों के पोस्टर लगाए गए हैं जिन्होंने विरोध के दौरान माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। जिस दौरान पूरे देश में नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर विरोध जारी था उस दौरान लखनऊ के कई इलाकों में भी विरोध हुआ था।
देखते ही देखते हालात बिगड़े और तमाम जगहों पर उपद्रव की घटनाएँ हुईं। तभी उत्तर प्रदेश सरकार ने ऐलान किया कि जो व्यक्ति इस तरह की घटनाओं में शामिल पाया जाएगा सरकार सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान का जुर्माना उन लोगों से वसूलेगी।

किस नियम के तहत कार्यवाई
इस मामले पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने फिलहाल मामले को गंभीर बताते हुए फैसला सुरक्षित रखा है। सोमवार के दिन मामले पर पूरा फैसला सुनाया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायाधीश रमेश सिन्हा की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा सरकार ऐसा कोई कदम न उठाए जिससे लोगों के दिलों को ठेस पहुंचे।
सरकार के पोस्टर लगाने वाले कदम पर पीठ ने कहा यह राज्य के साथ साथ राज्य के नागरिकों का भी अपमान है। आखिर ऐसी कार्यवाई किस नियम के तहत की गई है? क्या सरकार लोगों की निजी स्वतन्त्रता और सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण नहीं कर रही है? हम सरकार से उम्मीद करते हैं कि सुनवाई पूरी होने से पहले उचित कदम उठाए जाएंगे।

नुकसान की राशि जमा करें
पोस्टर में उपद्रव करने वालों की तस्वीरें और जानकारी भी मौजूद है। पोस्टर में ऊपर ही लिखा है कि ‘लखनऊ के हज़रतगंज क्षेत्र में सरकारी/निजी संपत्ति को दिनांक 19/12/19 की हिंसा में क्षति पहुंचाने के संबंध में नियत तिथि तक पूरी वसूली की रकम जमा करना सुनिश्चित करें।
अन्यथा की स्थिति में संबन्धित व्यक्ति की सम्पत्तियों को नियमानुसार कुर्क करके निर्धारित धनराशि वसूल की जाएगी।’ इसके अलावा पोस्टर में यह भी लिखा है कि शहर भर में कितने का नुकसान हुआ और लोगों से कितने का जुर्माना वसूला जाएगा।

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