बेंगलुरू से राजस्थान के अपने गांव तक 1846 किलोमीटर का सफर पैदल, ट्रक और बाइक पर सात दिन में किया पूरा

बेंगलुरू

लॉकडाउन के बीच हौसले से मंजिल तक पहुंचने की मिसाल बने प्रवीण कुमार

ये खबर राजस्थान के जालौर जिले में रहने वाले 28 वर्षीय प्रवीण कुमार की है, उनके हौसले और कभी न हिम्मत हारने की है। पेशे से वेल्डिंग का काम करने वाले प्रवीण ने कोरोना वायरस के चलते देश में जारी लॉकडाउन के बीच गजब की हिम्मत दिखाई। ये बेंगलुरू में काम करते हैं।

लॉकडाउन की घोषणा के बाद प्रवीण बेंगलुरू में ही फंस गए। मगर मायूस नहीं हुए। कोई वाहन नहीं मिलने पर इन्होंने पैदल ही अपने घर के लिए निकलने का फैसला किया। फिर क्या था, ठान लिया, सो पूरा करके ही दम लिया।

प्रवीण ने 26 मार्च की रात बेंगलुरू के शिवाजी नगर से पैदल चलना शुरू किया। और सात दिनों में 1846 किलोमीटर की यात्रा तय कर एक अप्रैल की रात जालौर अपने घर पहुंच गए। प्रवीण का घर जालौर के चितलावदा गांव में है। अपनी इस यात्रा में इन्होंने ट्रक वालों, सिलेंडर ढोने वालों, वैन चालक और बाइक सवार की भी मदद ली। प्रवीण के घर सही सलामत पहुंचने पर सभी बेहद खुश हैं। हैरान करने वाली इस पैदल यात्रा के बारे में पूछने पर प्रवीण भोलेपन के साथ कहते हैं, “हम राजस्थानियों की इसकी आदत है, हम अपने क्षेत्रों में भी ज्यादातर पैदल ही चलते हैं।

प्रवीण की कहानी उन लोगों के लिए मिसाल है, जो संकट में लड़ने के बजाय जल्द हथियार डाल देते हैं। यह पूछने पर कि उन्होंने यह फैसला क्यों किया, प्रवीण कहते हैं, “लॉकडाउन में काम छिन गया, बिना काम-पैसे के बेंगलुरू में समय बिताना मुश्किल हो रहा था।”

26 मार्च की रात को चले…और 1 अप्रैल की रात पहुंचे घर

26 मार्च रात : बेंगलुरू के शिवाजी नगर से पैदल चले।
27 मार्च सुबह : तुमकुर पहुंचे। 70 किमी पैदल चले।
27 मार्च रात : सिलेंडर ढोने वाली गाड़ी से चित्रदुर्ग पहुंचे। 270 किमी दूरी तय हुई।
28 मार्च : ट्रक की मदद से रानेबेन्नूर पहुंचे। 370 किमी दूरी तय हुई।
28 मार्च रात : ट्रक की मदद से रानेबेन्नूर से बेलगांव पहुंचे। 570 किमी दूर तय की।
29 मार्च : आराम किया।
29 मार्च रात : उसी ट्रक से पुणे पहुंचे। 920 किमी दूरी तय हुई।
30 मार्च : आराम किया।
30 मार्च शाम : उसी ट्रक से गुजरात बॉर्डर की तरफ चले।
30 मार्च रात : दूध डिलीवरी वाहन से गुजरात पार किया। 1570 किमी दूरी तय की।
31 मार्च रात : उसी वाहन से पालनपुर पहुंचे। 1715 किमी दूरी तय हुई।
01 अप्रैल सुबह : सब्जी ढोने वाले ट्रक से देस्सा पहुंचे। 1745 किमी दूरी तय हुई।
01 अप्रैल : पैदल चलकर धनेड़ा पहुंचे। 1780 किमी दूरी तय की।
01 अप्रैल शाम : एक वैन से नेनावा (गुजरात-राजस्थान बॉर्डर) पहुंचे। 1805 किमी दूरी तय की।
01 अप्रैल शाम : पैदल राजस्थान के संचोरा पहुंचे। 1823 किमी दूरी तय की।
01 अप्रैल रात : बाइक से अपने गांव पहुंचे। 1846 किमी दूरी तय की।

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