सरकारी विद्यालय के शिक्षक ने खुद से रुपए जोड़ कर बच्चों को कराई हवाई यात्रा

विभव देव शुक्ला

समाज में अक्सर ऐसी घटनाएँ होती हैं जिनके बारे में देख और जान कर हैरानी होती है। इस तरह की घटनाओं के बीच कुछ ऐसी घटनाएँ भी होती हैं जिन्हें देख कर हैरानी के साथ-साथ खुशी भी होती है। ऐसा लगता है जैसे इसका होना ज़रूरी था, घटना का असर उल्लेखनीय है। ऐसा ही कुछ हुआ है मध्य प्रदेश के देवास शहर में जहाँ एक सरकारी विद्यालय में पढ़ाने शिक्षक ने खुद रुपए इकट्ठा करके पढ़ने वाले छोटे बच्चों को हवाई यात्रा कराई।

बच्चों के लिए पहली हवाई यात्रा
मध्य प्रदेश के देवास शहर में एक छोटा सा गाँव है बीजेपुर और यहाँ के एक सरकारी विद्यालय में शिक्षक हैं किशोर कनसे। किशोर जी ने सरकारी विद्यालय में पढ़ने वाले कक्षा 6,7 और 8 के बच्चों को ऐसा अनुभव दिया जिसके बारे में शायद ही उन्होंने कल्पना की होगी। फरवरी महीने की 14 तारीख को यह बच्चे दो दिन के दिल्ली भ्रमण पर जाने वाले थे। कार्यक्रम पहले से ही लगभग तय था इसलिए किशोर जी ने बच्चों के लिए कुछ अनूठा करने का सोचा।

सामने से बहुत बड़ा नज़र आता है
किशोर जी ने बच्चों को हवाई यात्रा कराने के लिए खुद से रुपए बचाना शुरू किए और उन्होंने इसके लिए लगभग 60 हज़ार रुपए इकट्ठे कर लिए। जिसके चलते कक्षा 6, 7 और 8 में पढ़ने वाले बच्चों को पहली बार हवाई यात्रा करने का मौका मिला। एक समाचार समूह से बात करते हुए कक्षा 6 में पढ़ने वाले तोहिद शेख नाम के बच्चे ने इस बारे में काफी कुछ बताया।
तोहिद ने कहा जब हम अपने खेल के मैदान से हवाई जहाज देखते हैं तो यह बहुत छोटा नज़र आता है। लेकिन आमने-सामने देखने पर समझ आया कि असल में यह कितना बड़ा है। बच्चों ने यह भी बताया कि वह लंच में कागज़ के हवाई जहाज बना कर उड़ाते थे। उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि इतनी जल्दी ऐसा कुछ हो सकता है।

लंच में उड़ाते थे कागज़ के हवाई जहाज
उनके लिए लंच के दौरान कागज़ के हवाई जहाज बना कर उड़ाना पसंदीदा काम हुआ करता था। लेकिन उनमें से किसी ने ऐसा नहीं सोचा था, तमाम बच्चों ने तो ऐसा भी कहा कि उनके लिए यह अनुभव भुला पाना नामुमकिन है। इसके बाद किशोर जी ने भी अखबार समूह से इस बारे में बात की।
उन्होंने कहा इनमें से तमाम बच्चों ने आज तक ट्रेन का सफर भी नहीं किया था। उस लिहाज़ से हवाई जहाज की यात्रा इन बच्चों के लिए बड़ी बात थी, मैं चाहता था कि उन्हें इसका अनुभव कम उम्र में हो। इसके ज़रिये बच्चों को अपने आने वाले कल के सपने पूरे करने में मदद मिलेगी।

ट्रेन की यात्रा में आया खयाल
संतोष जी ने यह भी कहा कि वह काफी दिनों से रुपए बचा रहे थे और वह इस बात का भी ध्यान रख रहे थे कि कब टिकट के दाम कम होते हैं। उन्हें इस बात की प्रेरणा उस दौरान मिली जब पिछले साल वह ट्रेन के ज़रिये बच्चों को आगरा लेकर गए थे।
वापसी के समय बच्चे बहुत खुश थे, तभी एक बच्चे ने कहा कि हवाई जहाज की यात्रा कितनी अलग होती होगी। तभी किशोर जी के ज़ेहन में यह खयाल आया कि क्यों न बच्चों की इस ख़्वाहिश को पूरा किया जाए। दो दिन की दिल्ली यात्रा में बच्चों ने तमाम जगहें नई जगहें देखीं।
इसमें लाल किला, संसद और कुतुब मीनार जैसी जगहें भी शामिल थीं और 17 को ट्रेन से वापस आए। इसके अलावा नितिन गुप्ता और आशा तिलोदिया नाम के शिक्षकों के लिए भी हवाई यात्रा का पहला अनुभव था। शिक्षकों का कहना था कि बच्चों के साथ यह अनुभव साझा करना अपने आप में शानदार था। बहुत से बच्चों के लिए यह किसी सपने से कम नहीं था।

admin