69000 शिक्षकों की भर्ती पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, आपत्ति दर्ज करने के लिए केवल एक हफ्ते का समय

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

उत्तर प्रदेश परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि अभ्यर्थी विवादित प्रश्नों पर आपत्तियों को एक सप्ताह के भीतर राज्य सरकार के सामने पेश करें।

भर्ती 2019 प्रक्रिया के अंतर्गत अंतिम चयन सूची में शामिल किये गये उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र देने के लिए 3 जून से 6 जून तक चलने वाली काउंसलिंग को स्थगित कर दिया है। परिषद द्वारा यह निर्णय इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ द्वारा आज जारी किये गये स्टे-ऑर्डर के बाद लिया गया है।

एक सप्ताह का समय दिया गया है

वरिष्ठ अधिवक्ता एचजीएस परिहार के मुताबिक, शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया है और कोर्ट ने अभ्यर्थियों को आपत्ति दर्ज करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। इन आपत्तियों को सरकार यूजीसी के पास भेजेगी। यूजीसी एक विशेषज्ञ कमेटी बनाकर सभी आपत्तियों को निस्तारित करेगी। मामले की अगली सुनवाई 12 जुलाई को होगी। 

न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक भर्ती प्रक्रिया स्थगित होने के बाद आज (3 जून) से शुरू हो रही काउंसलिंग भी रुक गई है। काउंसिलिंग कराने आए अभ्यर्थियों से उनके हस्ताक्षर लेकर उन्हें वापस जाने को कहा जा रहा है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग ने जो आंसर की जारी की है, उसमें उन सवालों के उत्तर कुछ और थे, जबकि एनसीईआरटी की किताबों में कुछ और दिया है। 


2019 में हुई थी शिक्षकों की भर्ती के लिए परीक्षा

दरअसल बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए छह जनवरी 2019 को लिखित परीक्षा कराई गई थी। इन पदों के लिए करीब चार लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। 

परीक्षा के बाद सरकार ने भर्ती का कटऑफ सामान्य वर्ग के अभ्यर्थी के लिए 65 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के लिए 60 प्रतिशत की अनिवार्यता के साथ तय की थी। इस आदेश को लेकर अभ्यार्थियों ने हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि सरकारी नियमों के हिसाब से भर्ती के लिए डाली गई याचिका पर सुनवाई हो और महाधिवक्ता हर सुनवाई में मौजूद रहें। हाई कोर्ट की एकल पीठ में इस तरह कई याचिकाएं दायर हुईं। एकल पीठ के फैसले को पुनर्याचिका के लिए दायर किया था। जस्टिस पंकज कुमार जायसवाल और जस्टिस करुणेश सिंह पवार की खंडपीठ ने 6 मई को केस में फैसला सुनाया था।

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