हिंदुस्तान का चीन को मुंहतोड़ जवाब, 43 सैनिक मार गिराए

नई दिल्ली

45 साल बाद चीन ने फिर दिया धोखा, पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार रात बातचीत करने पहुंचे भारतीय जवानों पर चीन के सैनिकों का हमला, दोनों ओर से चले लाठी-डंडे, पत्थरबाजी भी हुई, भारत के 20 जवान शहीद

लद्दाख में करीब 45 साल बाद चीन ने एक बार फिर भारत को धोखा दिया है। गलवान घाटी में एलएसी पर सोमवार रात विवाद को शांति से सुलझाने गए भारतीय पक्ष पर उसने लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला बोल दिया। भारतीय सैनिकों ने इसका जवाब दिया। इस घटना में भारत के 20 सैनिक शहीद हो गए। चीन के भी 43 सैनिकों की या तो मौत हुई या गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से यह दावा किया है। चीन की सीमा पर 45 साल बाद, भारतीय सेना के कर्मियों की शहादत की यह पहली घटना है। इससे पहले 1975 में अरुणाचल प्रदेश में तुलुंग ला में हुए संघर्ष में 4 भारतीय जवान शहीद हुए थे।

ताजा घटना सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे के उस बयान के कुछ दिन बाद हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के सैनिक गलवान घाटी से पीछे हट रहे हैं। टकराव 14 हजार फीट ऊंची गलवान घाटी में पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 के पास हुआ।

वार्ता करने पहुंचे भारतीय पक्ष ने चीनी सैनिकों से उनकी सीमा में और पीछे जाने को कहा। उसी दौरान चीनी सैनिकों ने बहस शुरू कर दी। बाद में हमला बोल दिया। दोनों पक्षों में टकराव करीब 3 घंटे तक जारी रहा। भारतीय शहीदों में 16 बिहार रेजीमेंट के कमांडिंग अफसर कर्नल संतोष बाबू, हवलदार पालानी, जवान कुंदन ओझा आदि शामिल हैं।

इस घटना के बाद तनाव खत्म करने के लिए चीनी सेना के अनुरोध पर मंगलवार सुबह दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत हुई। उधर, पेइचिंग में चीनी उप विदेश मंत्री लुओ झाओहुई से भारतीय राजदूत विक्रम मिसरी ने मुलाकात कर इस पर चर्चा की।

उल्टे भारत पर लगाया बॉर्डर क्रॉस करने का आरोप

हैरान करने वाली बात ये है कि इस बार चीन ने उल्टे भारत पर आरोप लगाया है। उसने कहा है कि 15 जून को भारत ने दो बार सीमा रेखा का उल्लंघन किया। चीन सरकार द्वारा संचालित अखबार ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया कि भारतीय सैनिकों ने गलवान घाटी में झड़प की शुरुआत की। वे चीनी क्षेत्र में घुस आए और चीन के सैनिकों पर हमला कर दिया।

चीन ने की यथास्थिति बदलने की कोशिश : विदेश मंत्रालय

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि झड़प से दोनों पक्षों को नुकसान हुआ है। चीन की सेना ने यथास्थिति बदलने की कोशिश की जिससे दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई। अगर चीन की तरफ से दोनों देशों के बीच हुई बातचीत का पालन किया जाता तो इसे टाला जा सकता था। भारत ने हमेशा अपनी सीमा में रहकर ही मूवमेंट किया है। उम्मीद है कि चीन भी यही करेगा।

इसलिए हुआ गलवान घाटी में टकराव

गलवान घाटी लद्दाख का वह क्षेत्र है, जहां पर गलवान नदी बहती है। पिछले सवा महीने से गलवान घाटी, पैंगोंग त्सो, गोगरा स्थित एलएसी पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच गतिरोध जारी है। खासतौर पर गलवान घाटी में चीनी सैनिकों का अच्छा खासा जमावड़ा है। सोमवार को गतिरोध दूर करने को लेकर ही भारतीय पक्ष वहां पहुंचा था। साल 1962 में दोनों देशों के बीच हुए युद्ध में भारत-चीनी सैनिकों के बीच इसी घाटी में टकराव हुआ था। जिसमें 33 भारतीय सैनिकों की जान गई थी। चीनी सेना हमेशा से ही विवादित क्षेत्रों में टेंट लगाकर उकसावे का काम करती रही है। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए कई बार बातचीत हो चुकी है। लेह स्थित 14वीं कोर के जनरल कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और तिब्बत सैन्य जिले के मेजर जनरल लीयू लिन ने 6 जून को करीब सात घंटे तक बैठक की थी। जिसका कोई नतीजा नहीं निकला है।

 

 

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