मैंने 30 हजार में खरीदा था बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड

मुंबई

जाने-माने अभिनेता ऋषि कपूर का मुंबई के एक अस्पताल में गुरुवार को निधन हो गया। वह 67 वर्ष के थे। ऋषि लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। तबीयत बिगड़ने के बाद बुधवार को उन्हें एच. एन. रिलायंस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अमेरिका में कैंसर का इलाज कराने के बाद वह पिछले साल सितंबर में भारत लौटे थे। फरवरी में भी तबीयत खराब होने की वजह से उन्हें दो बार अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

उनका अंतिम संस्कार मुंबई के मरीन लाइन के चंदनवाड़ी श्मशान घाट पर किया गया। ऋषि कितने बेबाक थे, यह उनकी किताब ‘खुल्लम खुल्ला’ से पता चलता है, जिसमें उन्होंने अपने बारे में कई खुलासे कई हैं।

ऋषि ने किताब में लिखा है, “ऐसा लगता है कि ‘बॉबी’ के लिए मुझे बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिलने से अमिताभ निराश हो गए थे। उन्हें लगा था कि ये अवॉर्ड ‘जंजीर’ के लिए जरूर मिलेगा। दोनों ही फिल्में एक ही साल (1973) में रिलीज हुई थीं। मुझे ये कहते हुए शर्म आती है कि मैंने वो अवॉर्ड खरीदा था। दरअसल उस वक्त मैं भोला-भाला सा था। तारकनाथ गांधी नामक एक पीआरओ ने मुझसे कहा, सर 30 हजार दे दो, तो मैं आपको अवॉर्ड दिलवा दूंगा। मैंने बिना कुछ सोचे उन्हें पैसे दे दिए। मेरे सेक्रेटरी घनश्याम ने भी कहा था, सर, पैसे दे देते हैं। मिल जाएगा अवॉर्ड। इसमें क्या है।

अमिताभ को बाद में किसी से पता चला कि मैंने अवॉर्ड के लिए पैसे दिए थे। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि 1974 में मैं महज 22 साल का था। पैसा कहां खर्च करना है, कहां नहीं, इसकी बहुत समझ नहीं थी। बाद में मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ। ‘कभी-कभी’ के दौरान रिलेशन में गर्मजोशी न होने की एक और कहानी है। अमिताभ फिल्म में सीरियस रोल में थे। जबकि मेरा रोल थोड़ा इसके उलट था। फिल्म में मैं खिलंदड़ा किस्म का हूं। अमिताभ रोल में गंभीरता बनाए रखने के लिए सेट पर अलग-थलग रहते थे। शायद सच तो ये है कि मैंने अवॉर्ड खरीदा था, सबने ये जान लिया था।”

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