“मैं तो भारत आने वाले बांग्लादेशी शरणार्थी को इन्फोसिस का अगला सीईओ बनते देखना पसंद करूंगा”-सत्या नडेला

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। नागरिकता संशोधन कानून पर रोज़ कुछ न कुछ सुनने या पढ़ने को मिल ही जा रहा है। हर दिन किसी नेता-मंत्री का आरोप लगाने से लेकर समर्थन करने के बयान आ ही जाता है इसी क्रम में माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ का बयान आया है।

अमेरिकी शहर मैनहटन में संपादकों के साथ एक मीटिंग में उनसे भारत के नागरिकता संशोधन कानून पर सवाल पूछा गया। नडेला भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक हैं और अक्सर भारतीय मूल के होने के चलते नडेला के अलावा बाकी लोगों को भी ऐसे सवालों से घेरा जाता है।

सवाल था, ‘आपकी माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों को सरकार के साथ डील करने में बड़ा दबाव झेलना पड़ रहा है। मैं जानना चाहता हूं कि भारत के नागरिकता कानून को लेकर आपकी क्या राय है और क्या आपको भारत की सरकार के साथ काम करने में दिक्कत हो रही है जिस तरह वह आंकड़ों का इस्तेमाल कर रही है?’

माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला ने नागरिकता (संशोधन) कानून पर दुख जताते हुए कहा है, “वह किसी बांग्लादेशी शरणार्थी को भारत में स्टार्टअप खड़ा करते या इन्फोसिस के सीईओ बनते देखना चाहते हैं।”

भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक नडेला ने कहा, “मुझे लगता है कि जो भी हो रहा है, वह काफ़ी दुखद है, यह बुरा है मैं तो भारत आने वाले बांग्लादेशी शरणार्थी को भारत में अगला यूनिकॉर्न बनाने या इन्फोसिस का अगला सीईओ बनते देखना पसंद करूंगा।” नडेला के इस बयान का प्रसिद्ध इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने समर्थन किया है।

इस सवाल के जवाब में उन्होंने आगे कहा कि मैं यह नहीं कह रहा कि किसी देश को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता नहीं करनी चाहिए। देशों के बीच सीमाएं होती हैं और यह हकीकत है।
मेरा मतलब है कि इमिग्रेशन इस देश (अमेरिका) का मुद्दा है, यह यूरोप और भारत का भी मुद्दा है, लेकिन ध्यान इस पर होना चाहिए कि कोई किस तरीके से यह तय करता है कि इमिग्रेशन क्या है, शरणार्थी कौन हैं, अल्पसंख्यक समूह कौन है?

इस बयान के बाद तमाम समर्थन-विरोध की प्रतिक्रिया भी आनी शुरू हो गयी है। भारतीय जनता पार्टी की सांसद मीनाक्षी लेखी ने मंगलवार को माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला पर निशाना साधते हुए कहा कि पढ़े-लिखे लोगों को शिक्षित करने की आवश्यकता है। नडेला ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को भारत के लिए गलत बताया है, जिसके बाद भाजपा नेता ने प्रतिक्रिया दी है।

लेखी ने इसे “साक्षर लोगों को शिक्षित होने की जरूरत” का एक सटीक उदाहरण बताते हुए ट्वीट किया, “सीएए को लाने का उद्देश्य बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए सताए हुए अल्पसंख्यकों को अवसर प्रदान करना है।”

साथ ही उन्होंने कहा, ‘कैसा हो यदि अमेरिका में यह अवसर यजीदियों के बजाय सीरियाई मुसलमानों को दिया जाए?’

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