अगर दीपिका ‘निर्भया’ की माँ और एसिड अटैक पीड़िताओं से मिलतीं तो ज़्यादा खुशी होती – विवेक अग्निहोत्री

विभव देव शुक्ला

देश के जाने माने जवाहर नेहरू विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों के साथ हिंसा हुई। थोड़े ही समय में मामला सुर्खियों में आ गया, हर तरफ इस घटना का विरोध होने लगा। नेताओं से लेकर फिल्मी सितारों तक लोगों का एक बड़ा हिस्सा इस घटना के विरोध में उतर गया लेकिन विरोध के दौरान कुछ ऐसा हुआ जिसके चलते पूरे मामले को एक नया पहलू मिल गया। 6 जनवरी की शाम जवाहर नेहरू विश्वविद्यालय में छात्रों के साथ हुई हिंसा का विरोध हो रहा था।

समर्थन और विरोध के बीच की बहस
विरोध की अगुवाई कर रहे थे जेएनयू के पूर्व छात्र कन्हैया कुमार। तभी वहाँ दीपिका पादुकोण पहुँच गईं, जिसके बारे में किसी ने नहीं सोचा था या यूं कहें ऐसा सोच पाना किसी के लिए भी मुश्किल था। विरोध और समर्थन किसी भी मामले का सबसे सार्थक पहलू होते हैं इसलिए दीपिका के इस कदम पर ज़ोरदार प्रतिक्रिया हुई। पूरा सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया, एक तरफ इस कदम को स्वीकारा गया तो दूसरी तरफ सिरे से नकार दिया गया।

सालों बाद ऐसे मुद्दे पर फिल्म बनी है
सोशल मीडिया के अलावा विरोध और समर्थन की लड़ाई में उतरे फिल्मी सितारे। जिसमें से ज़्यादातर फिल्मी सितारों ने दीपिका का समर्थन किया लेकिन कुछ ने इसका सीधा विरोध किया। इस कड़ी में सबसे पहला नाम आता है विवेक अग्निहोत्री का, जिन्होंने एक समाचार समूह से बात करते हुए इस मामले पर तमाम बातें कहीं।
सबसे पहले उन्होंने कहा मुझे बिलकुल आश्चर्य नहीं हुआ, मुझे जानकारी थी कि फिल्म आ रही है और उसका प्रचार नहीं हो पा रहा था और उसकी चर्चा नहीं हो पा रही थी। इतना शानदार विषय है, इतने सालों बाद किसी ने इतने अच्छे मुद्दे पर फिल्म बनाई है। तो मुझे ऐसा लगा कि दीपिका शायद निर्भया की माँ के साथ तस्वीर खिंचवाएंगी। असल पीड़ितों के साथ तस्वीरें लेंगी, क्या आपको पता है कि कंगना रनौट बहन भी एसिड अटैक पीड़ित हैं।

इस कदम के पीछे कौन है
वही फिल्म के प्रचार का सही तरीका है। लेकिन उन्हें उनके समूह ने सलाह दी होगी कि निर्भया ट्रेंड में नहीं है और लोग इस मुद्दे से ऊब चुके हैं। क्योंकि पूरे मीडिया का ध्यान एक तरफ था इसलिए दीपिका वहाँ गईं और इसके लिए दीपिका को दोष देना सही भी नहीं है। इसे ऐसे समझिए कि जब हम कोई कठपुतली का नृत्य देखते हैं तो कुछ गलत होने पर कठपुतली को नहीं सुनाते हैं बल्कि कठपुतली चलाने वाले की बुराई करते हैं। हमें यह जानना चाहिए कि इसके पीछे कौन?
इसके बाद उन्होंने कहा पूरे देश में लगभग 30 करोड़ छात्र हैं जिसमें से महज़ 1 या 2 लाख छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। इसका मतलब यह भी हुआ कि आप बाकी के छात्रों का नज़रिया नहीं जानना चाहते हैं। और एक 35 साल के व्यक्ति (कन्हैया कुमार) को आप छात्र कैसे कह सकते हैं? अब तो वह जेएनयू में पढ़ता भी नहीं है। फिल्मी सितारे वातानुकूलित गाड़ियों और कमरों में बैठ कर ऐसी चीजों की योजना बनाते हैं।

निर्भया की माँ के साथ तस्वीर
दीपिका ने हाल ही में विन डीज़ल के साथ एक हॉलीवुड की फिल्म भी की थी। मेरा उनसे सवाल है क्या वह अमेरिका के किसी विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों का समर्थन कर सकती हैं? इसके बाद उन्होंने कहा पूरे बॉलीवुड में लगभग 5 लाख पंजीकृत लोग हैं उनमें से कितने इस प्रदर्शन में शामिल हुए?
बॉलीवुड के कुछ लोगों के समर्थन कर देने का यह मतलब नहीं होता कि बॉलीवुड का हर इंसान जेएनयू के छात्रों का समर्थन करता है। अंत में विवेक अग्निहोत्री ने कहा ‘मुझे ज़्यादा अच्छा लगता अगर दीपिका ‘निर्भया’ की माँ के साथ तस्वीर खिंचवाती। दीपिका बाकी एसिड अटैक पीडिताओं से मिलतीं, उनसे बातें करतीं और तस्वीर खिंचवातीं।

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