विद्युत विभाग में शिकायत डाली तो जवाब आया अगर बिल में छूट पाना है तो बीजेपी को हटाना है, कांग्रेस को लाना है

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

विद्युत विभाग की अधिकृत वेबसाइट पर एक उपभोक्ता ने बिजली बिल से संबंधित एक शिकायत डाली। अब जब भी हम कहीं किसी विभाग में शिकायत डालने पर आमतौर पर ये होता है कि उधर से जवाब के तौर पर आपको आपके शिकायत का सॉल्यूशन मिलता है लेकिन मध्य प्रदेश के विद्युत विभाग की वेबसाइट पर इससे उलट जवाब मिला।

मध्यप्रदेश के आगर मालवा में ज्यादा बिल आने की शिकायत ऑनलाइन दर्ज करने पर उपभोक्ता को मैसेज आया कि यदि आपको बिजली बिल पर छूट पाना है, तो बीजेपी को हटाना है और कांग्रेस को लाना है।

दरअसल, आगर मालवा के हरीश जाधव का करीब 30 हज़ार रुपये से अधिक का बिल आया तो उन्होंने बिजली विभाग में इसकी शिकायत की। बिजली विभाग की वेबसाइट पर उन्होंने इसकी शिकायत की जिसके बदले उन्हें एक एप्लिकेशन आईडी दी गई।

अगले दिन जब हरीश जाधव ने बिजली विभाग की वेबसाइट पर जाकर अपनी शिकायत का स्टेटस चेक किया तो उनके होश फाख्ता हो गए। वेबसाइट में शिकायत के स्टेटस के साथ क्लोज़ रिमार्क में लिखा था “अगर बिल में छूट पाना है तो बीजेपी को हटाना है। कांग्रेस को लाना है। 100 रुपये में 100 का आना है।”

क्लोज़ रिमार्क देख हरीश जाधव का माथा ठनका और उन्होंने इसकी शिकायत बिजली विभाग के साथ-साथ कलेक्टर कार्यालय में जाकर भी की। जांच के बाद मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के आगर मालवा शहर वितरण केंद्र में कार्यरत एक असिस्टेंट इंजीनियर को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही मामले में विभागीय जांच भी बैठा दी गई है।

इस मैसेज ने आम लोगों को सकते में डाल दिया है। इस पूरे मामले में मध्य प्रदेश विद्युत विभाग आगर के जूनियर इंजीनियर से बात हुई तो उन्होंने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। यह हमारे विभाग की ही साइट है।

मगर यह इस तरह का जो संदेश आ रहा है, वो किसी की कारस्तानी हो सकती है। हमारी आईडी पासवर्ड कई लोगों के पास होते हैं। वहां से ही कुछ हुआ होगा। हम भी इसकी शिकायत वरिष्ठ कार्यालय को दे चुके है।

यह मामला इसलिए भी ज्यादा गम्भीर है क्योंकि आगर-मालवा मध्य प्रदेश की उन विधानसभा सीटों में से एक है जहां उपचुनाव होना है। इस साल जनवरी में आगर-मालवा से बीजेपी विधायक मनोहर ऊंटवाल का निधन होने से ये सीट खाली हो गई थी। माना जा रहा है कि इस मामले में अन्य अफसरों पर भी कड़ी कार्यवाही हो सकती है।

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