सोशल डिस्टेंसिंग में इसे पढ़ेंगे तो ज़िंदगी के करीब आ जाएंगे !

डॉ. प्रवीण झा

सिकंदर न होता तो नाई ही करते हमारी सर्जरी

पहले नाई ही शल्य-क्रिया करते थे। मतलब बाल काटने से लेकर पथरी का ऑपरेशन तक सलून में ही हो जाता था। दाँत भी निकाल देते थे। यूरोप में यह उन्नीसवीं सदी तक आम था, उसके बाद ही बैचलर ऑफ सर्जरी आया। भारत के ग्रामीण इलाकों में तो हल्का-फुल्का मवाद निकालना, गोदना बनाना, मसाज कर के टूटी हड्डी सेट करना नाई करते रहे हैं। उनके पास उस्तरा, नहरनी के साथ छोटा-मोटा सर्जिकल सेट भी रहता था। बाद में कई लोग कम्पाउंडरी भी करते रहे, और बाल भी काटते रहे। उड़ीसा के कालाहांडी तरफ यह शायद अब भी चलता है। यह भी कहा जाता है कि प्लास्टिक सर्जरी की खोज पुणे के आस-पास के एक नाई ने ही की। नाक के ऊपर साबुन चिपका कर उतना फ्लैप काट कर घुमा कर कटी नाक के ऊपर लगा दिया। नाक काटना एक सामाजिक परंपरा तो थी ही, जो पंचैती में कट जाती थी। फिर नाई नाक जोड़ता था। पुराने जहाजों पर भी नाई ही सर्जन होते थे। वास्को-द-गामा के समय, और उसके बाद भी। यह भी कहा जाता है कि पहले नाई फुल-टाइम सर्जन ही थे, नाई बाद में बने। मतलब, बाल छँटाने का रिवाज था नहीं। वह तो सिकंदर के सैनिकों को जब दाढ़ी और बाल खींच के मारने लगे, तो सिकंदर ने फौजियों का ‘बाटी कट’ बाल कटवाना शुरु किया।

खुसरो ने ही किया चुटकुलों का आविष्कार

चुटकुले के इतिहास पर जो मालूम है, कहे देता हूँ। कुमार प्रसाद मुखर्जी की हिंदुस्तानी संगीत पर किताब में लिखा है कि जौनपुर में पहले ‘चुटकुले’ गाए जाते थे, लेकिन इसका कोई संदर्भ या असल चुटकुला मुझे मिला नहीं। जौनपुरी चुटकुले गढ़ते होंगे, इसमें कोई शक नहीं। इस पर मैंने बहुत गहन शोध किया भी नहीं कि अंत में यही सिद्ध होना है कि खुसरो ने ही चुटकुले का भी आविष्कार किया।

विश्व इतिहास का सबसे पुराना चुटकुला मेसोपोटामिया में दर्ज है। मिस्र में भी। यह जानकारी इंटरनेट पर भी मिल जाएगी। उन चुटकुलों को यहाँ लिखना संभव नहीं, लेकिन यह स्पष्ट है कि आज से चार हज़ार साल पहले वर्तमान सामाजिक मानक के हिसाब से बड़े अश्लील चुटकुले बनते थे।

गजेंद्र बाबू ने भी अपनी किताब में हर्षचरितम् का हवाला देकर लिखा है कि बाणभट्ट अश्लील रास पदों का जिक्र करते हैं। इसे उन्होंने लोक परंपरा में गायी जाने वाली ‘गारी’ से जोड़ा है। लेकिन जनाना चुटकुले सदा से अश्लील ही रहे हैं, यह बात दिखती है।
अब बात निकली, तो बस कुछ दूर निकल गयी।

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