ये उड़ान देखेंगे तो आपको मिलेगा सपने सच करने का हौसला

विकाससिंह राठौर | इंदौर

बोइंग 787 ड्रीम लाइनर उड़ाने वाली दुनिया की पहली महिला पायलट ने महिला दिवस पर प्रजातंत्र से साझा की अपनी उड़ान की कहानी…बच्चियों से कहा- मेहनत करें, आप जो भी बनना चाहें, बन सकती हैं।

मैं बचपन से पायलट बनना चाहती थी। जब स्कूल में मेरे साथ के बच्चे ए फॉर एप्पल कहते थे मैं तब ए फॉर एरोप्लेन कहती थी। मेरा पढ़ने में मन नहीं लगता था और मैं क्लास की खिड़की से बाहर हवाई जहाजों को उड़ते हुए देखती थी। 1984 में मैंने 21 साल की उम्र में पायलट बनकर एअर इंडिया ज्वाइन किया था। मुझे प्लेन उड़ाने का लाइसेंस पहले मिल गया था और इसके बाद मैंने ड्राइविंग लाइसेंस लिया था।

यह बात दुनिया की पहली बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान उड़ानें वाली महिला पायलट निवेदिता भसीन ने खुद बताई। वे 19 सितंबर 2012 को अमेरिका से यह विमान उड़ाकर दिल्ली लाई थीं। इंदौर एयरपोर्ट पर विश्व महिला दिवस के कार्यक्रम में भाग लेने आईं भसीन के नाम पर कई उपलब्धियां दर्ज हैं। उन्होंने बताया कि ड्रीमलाइनर को उड़ाना किसी रोमांच से कम नहीं था। हमने बोइंग की फैक्ट्री में जाकर ड्रीमलाइनर की डिलीवरी ली, भारतीय पद्धति से विमान की पूजा की और उड़ाकर भारत लेकर आए। महज 26 साल की उम्र में वे दुनिया की पहली सबसे कम उम्र की बोइंग विमान की कमांडर भी बनीं। वह देश की एक मात्र महिला पायलट भी हैं जिन्होंने 22 हजार घंटे से ज्यादा की फ्लाइंग की है। वे 36 सालों से लगातार विमान उड़ा रही हैं।

परिवार ने हर इच्छा पूरी करने में की मदद, आज पूरा परिवार पायलट

निवेदिता ने बताया, मेरेे परिवार में एविएशन की फील्ड से कोई नहीं था, लेकिन मेरे सपनों को पूरा करने के लिए पूरे परिवार ने सहयोग किया। जिसके चलते मैं पायलट बन पाई। जब मैं पायलट बनी तब देश में सिर्फ दो ही और महिला पायलट थीं। तब लोगों ने कई तरह की बातें की, लेकिन मैंने सबको चुनौती के रूप में लेते हुए सपनों को साकार किया। मेरे पति भी पायलट हैं और आज मेरा बेटा, बेटी और दामाद भी पायलट हैं।

स्कूल में सब ए फॉर एप्पल बोलते थे, मैं ए फॉर एरोप्लेन बोलती थी

एयरपोर्ट डायरेक्टर अर्यमा सान्याल ने एयरपोर्ट पर महिला दिवस के अवसर पर शासकीय स्कूल की बच्चियों को बुलाकर अपने क्षेत्रों में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर चुकी महिलाओं को बुलाकर उनसे बच्चों को मिलवाया। इस दौरान निवेदिता ने कहा कि वे बचपन से पायलट बनना चाहती थीं, उनका पढ़ाई में मन नहीं लगता था। सब बच्चे जब ए फॉर एप्पल कहते थे तो मैं ए फॉर एरोप्लेन कहती थी।

काठमांडू से हाईजैक हुए विमान में बतौर पायलट जाने वाली थी: निवेदिता भसीन ने बताया कि 24 दिसंबर 1999 को काठमांडु से जो विमान हाईजैक कर कंधार ले जाया गया था, वे उस विमान पर बतौर पायलट जाने वाली थीं। उन्हें कोलकाता से एक फ्लाइट लेकर दिल्ली जाना था और दिल्ली से इस फ्लाइट पर जाना था। लेकिन कोलकाता की फ्लाइट लेट होने के कारण वे उस फ्लाइट पर नहीं जा पाई थीं।

admin