अगर मुफ्त में ताण्हाजी या छपाक देखनी हो तो भोपाल चले जाइए

विभव देव शुक्ला

आम लोगों के पास फिलहाल मनोरंजन की कोई कमी नहीं है। चाहे वह सोशल मीडिया की ओर निहार लें, टेलीवीज़न देख लें, महानगरों में हैं तो बाहर निकल कर सीधे प्रसारण का आनंद लें। हर जगह जिरह ने अपनी जगह बना रखी है, हर कोने में मचे शोर की मात्रा में एक फीसद की कमी नहीं है। हर मंच पर रायचंद और ज्ञानचंद मौजूद हैं, संसार की कोई दिव्य शक्ति आपको उनसे नहीं बचा सकती है।

एक तरफ ताण्हाजी तो दूसरी तरफ छपाक
आज दो बड़ी फिल्में सुनहरे पर्दे पर उतर चुकी हैं और दोनों ही फिल्मों को लेकर लोगों का उत्साह चरम पर था। पहली फिल्म थी छपाक और दूसरी फिल्म थी ताण्हाजी। छपाक एक एसिड अटैक पीड़िता की ज़िन्दगी पर आधारित फिल्म थी जिसका किरदार दीपिका पादुकोण निभा रही हैं। वहीं ताण्हाजी एक ऐसे योद्धा की कहानी है जिन्होंने छत्रपति शिवाजी की सेना में मराठा साम्राज्य की स्थापना की। दोनों ही फिल्में देखने के लिहाज़ से दर्शकों की सूची में ऊपर कायम थीं।

बंट रहे मुफ्त में टिकट
इस बीच मध्य प्रदेश सरकार ने छपाक फिल्म को राज्य के भीतर कर मुक्त कर दिया। जिसके कुछ ही समय बाद नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया, भोपाल के पदाधिकारियों ने ऐलान किया कि वह लोगों को मुफ्त में छपाक के टिकट बाटेंगे। यहीं से मुद्दे पर वैचारिक और सामाजिक टकराव की स्थितियाँ बनीं। इस ऐलान के कुछ समय बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि वह ताण्हाजी की टिकट मुफ्त में बाटेंगे। यानी मध्यप्रदेश की राजधानी में दोनों फिल्मों के टिकट बंट रहे हैं बस दर्शकों को तय करना है कि उनकी आमद किस ओर होगी।

पीड़िता की वकील ने की शिकायत
छपाक पहले से ही विवादों में घिरी हुई है, पिछला विवाद असल एसिड अटैक पीड़िता का मुकदमा लड़ने वाली वकील से जुड़ा हुआ था। अपर्णा भट्ट ने एसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी का मुकदमा लड़ा था, उन्होंने निर्माताओं पर आरोप लगाया है कि फिल्म में उन्हें कोई श्रेय नहीं दिया गया है। अपने फेसबुक पेज पर अपर्णा लिखती हैं मैं इस बात से काफी परेशान हुई हूँ कि छपाक फिल्म में मेरा उल्लेख ही नहीं है।
मैं अपनी पहचान बचाने के लिए निर्माताओं पर संवैधानिक कार्यवाई भी करूंगी। भले मेरी पहुंच प्रोड्यूसर और दीपिका तक नहीं है लेकिन इसके बावजूद मैं चुप नहीं रहने वाली हूँ। एएनआई ने इस मामले पर ट्वीट करते हुए लिखा कि अपर्णा ने दिल्ली के पटियाला हाउस अदालत में छपाक फिल्म पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर की है। याचिका में अपर्णा का कहना है कि वह लक्ष्मी की आधिकारिक वकील थीं लेकिन फिल्म की कहानी में कहीं उनकी बात नहीं हुई है।

धार्मिक पहचान छिपाने का आरोप
उसके पहले फिल्म दूसरे विवाद को लेकर सुर्खियों में बनी थी। दो दिन पहले सोशल मीडिया पर एक खबर चली कि जिस व्यक्ति ने पीड़िता पर एसिड अटैक किया था उसका नाम फिल्म में राजेश है। जबकि असल में उस व्यक्ति का नाम नईम है, लोगों का कहना है कि फिल्म में आरोपी की धार्मिक पहचान क्यों बदली गई? लोग फिल्म के निर्माताओं पर आरोप लगा रहे हैं कि आरोपी की पहचान बदलने से धार्मिक भावनाएँ आहत होंगी। लेकिन इस बहस के असर में आने के थोड़े समय बाद ही मामले का दूसरा पक्ष सामने आया।

चली थी ट्वीट्स की लड़ाई
जब सोशल मीडिया पर मौजूद कुछ लोगों ने दूसरी जानकारी देना शुरू किया। नेटिज़न ने बताया कि फिल्म में मुख्य आरोपी का नाम राजेश नहीं बल्कि बशीर उर्फ बबलू है। फिलहाल यह दोनों ही नाम ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे हैं, राजेश और नईम। राजेश के नाम पर लगभग 75 हज़ार ट्वीट हो चुके हैं वहीं नईम के नाम पर लगभग 85 हज़ार ट्वीट हो चुके हैं। पूरा सोशल मीडिया फिलहाल इसी बहस में उलझा हुआ है और ताज्जुब वाली बात यह है कि इस तरह मामले पर समाज में बड़े पैमाने पर भ्रम के हालात बनेंगे।

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