गलवान पुल पर भारत ने तोड़ा चीन का गुरूर

लद्दाख

लोड टेस्ट में जीती भारतीय सेना

गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ 15 जून की रात को हुई खूनी झड़प के बाद भारतीय सेना ने 72 घंटे के भीतर पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में श्योक नदी पर एक पुल का निर्माण पूरा कर लिया है, जो श्योक-गलवान नदियों के मिलन बिंदु के बेहद करीब है। यह पुल पेट्रोलिंग पॉइंट-14 के ट्रैक पर तो नहीं है, लेकिन इससे बहुत दूर भी नहीं है। पेट्रोलिंग पॉइंट-14 ही वह स्थान है जहां दोनों सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी। चीन इस पुल को बनाने का विरोध कर रहा था। शनिवार को सेना ने 2 घंटे तक इस पुल से वाहनों को गुजारकर परीक्षण भी किया, जो सफल रहा।

गलवान घाटी में हिंसक संघर्ष के दौरान ही आर्मी की कारू बेस्ड डिवीजन ने सेना की इंजीनियर डिवीजन को इस ‘बेली ब्रिज’ का निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए थे। इंजीनियरों ने दिन-रात मेहनत की। खून जमा देने वाली सर्दी में भी काम जारी रखा।

ये होगा फायदा : यह पुल तैयार हो जाने से भारतीय सेना की एलएसी पर पहुंच आसान हो गई है। इस पुल से सैनिक नदी के पार जाकर 255 किलोमीटर लंबे स्ट्रैटिजिक डीबीओ रोड की सुरक्षा कर सकते हैं। यह सड़क दरबुक से दौलत बेग ओल्डी में भारत के आखिरी पोस्ट तक जाती है, जो काराकोरम के पास है।

72 घंटे में पुल तैयार

यह एक तरह से पोर्टेबल पुल होता है जिसे सेना अपनी जरूरत के लिहाज से उस जगह बनाती है जहां आने-जाने के लिए उचित मार्ग नहीं होते हैं। मिशन पूरा होने के बाद सेना यह अस्थाई पुल नष्ट कर देती है।

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