भारत के खिलाफ ‘टूलकिट’ है विदेशी साजिश!

– प्रभुनाथ शुक्ल, स्वतंत्र टिप्पणीकार

किसान आंदोलन की आड़ में क्या भारत में हिंसा फैलाने की साजिश रची गई। क्या कनाडा स्थित खालिस्तानी संगठन से जुड़े लोग पंजाब में पुन: अपना अस्तित्व कायम करना चाहते हैं। दिल्ली के लाल किले पर 26 जनवरी को जो कुछ हुआ वास्तव में इस साजिश में विदेशी ताकतों का हाथ था। किसान आंदोलन की आड़ में क्या पंजाब में खालिस्तान से जुड़े लोग एक बार फिर आतंकवाद की नई कोपलें उगाना चाहते हैं। दिल्ली पुलिस की जांच में ‘टूलकिट’ मामले में जो तथ्य सामने आएं हैं कम से कम वे इसी तरफ इशारा करते हैं।

दिल्ली पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़े रही है चेहरे बेनकाब हो रहे हैं। अब तक ‘टूलकिट’ के नव रत्नों का नाम बेनक़ाब हुआ है। भारत में ‘टूलकिट’ पर राजनीतिक सरगर्मियां भी तेज हो गई हैं। दिशा रवि और अन्य की गिरफ्तारी को मामले को लेकर सत्ता के खिलाफ विपक्ष लामबंद हो चला है। दिल्ली पुलिस की प्राथमिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं उससे तो यही साबित होता है कि कनाडा में बैठे खालिस्तान संगठन और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने मिल कर इस साजिश को अंजाम दिया। हालांकि अभी जांच की प्रक्रिया लम्बी चलेगी। इस साजिश में और चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।

दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन को उग्र करने में ‘टूलकिट’ का सहारा लिया गया। ‘टूलकिट’ एक गूगल दास्तावेज है जिसे अपनी सुविधा के अनुसार एडिट किया जा सकता है। सोशल मीडिया पर यह किट अपने संगठन से जुड़े लोगों के बीच वायरल की जाती है। इस ‘टूलकिट’ में सारी बातें विस्तार से लिखी होती हैं, जिसमें आंदोलन को कैसे भड़काना है। किस-किस को जोड़ना है। जिसके पास अधिक फॉलोवर होते हैं उसे वरीयता के आधार पर जोड़ा जाता है। इसमें सारी बातें लिखित होती हैं। ‘टूलकिट’ में जिस तरह की बातें लिखी गईं थीं लालकिले पर उसी तरह घटना को अंजाम दिया गया। देश की ख़ुफ़िया एजेंसियों ने भी किसान आंदोलन की आड़ में हिंसा फैलाने की आशंका पहले ही जाहिर कर चुकी थी। टूलकिट’ का मामला बेहद संवेदनशील है। यह मामला देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। दिल्ली पुलिस की जांच में अब तक जितने लोगों के नाम आए हैं आए हैं उनमें अधिकांश पर्यावरणविद और जलवायु एक्टिवस्ट हैं। सभी युवा और ग्लोबल स्तर पर चर्चित चेहरे हैं। लोगों ने बेहद कम उम्र में दुनिया में अपनी पहचान बनाई है, लेकिन उनकी साजिश बेहद ख़तरनाक है। दिशा रवि भी एक पर्यावरण कार्यकर्ता हैं वह कोई नाबालिग नहीं हैं। लेकिन इसमें खालिस्तान संगठन की भूमिका अहम् है।

दिशा ने अपनी सोच से लोगों को प्रभावित भी किया है, लेकिन जिस ‘टूल किट’ का उपयोग कर देश और विदेश में बैठी उनकी टीम किसान आंदोलन को भड़काने और हिंसक बनाने की साजिश रची उसके लिए वह निश्चित रूप से जिम्मेदार हैं। उसके शातिर दिमाग ने देश के खिलाफ साजिश रचने की कोशिश की है। एक अच्छी पढ़ी-लिखी लड़की विदेशी साजिश में आकर अगर इस तरह की सोच रखती है तो उसे मासूम युवा भला कैसे कहा जा सकता है। ग्रेटा थनबर्ग और दिशा के बीच हुए चैट खुद इसकी गवाही देते हैं। दिल्ली पुलिस की जांच में अभी तक ‘टूलकिट’ के नौ रत्नों के नाम सामने आएं हैं जिसमें दिशा रवि, निकिता जैकब, शांतनु, ग्रेटा थनबर्ग, पीटर फेड्रिक, अनिता लाल, एमओ भालीवाल, भजन सिंह भिंडरावाला समेत और नाम हैं। इसमें कुछ लोग खालिस्तानी संगठन से जुड़े हैं। शांतनु के ईमेल से ‘टूलकिट’ वायरल हुआ है। वह खालिस्तानी संगठन से जुड़े एमओ भालीवाल के संपर्क में आया और किसान आंदोलन से जुड़ कर ‘टूलकिट’ को वायरल किया। शांतनु को अदालत से जमानत मिल चुकी है। उधर अनिता जैकब को भी मुंबई हाईकोर्ट से तीन हफ्ते तक गिरफ्तारी पर रोक लग गईं है पुलिस इस बीच उसे गिरफ्तार नहीं कर सकती है।

भारत के साथ विदेश में बैठे लोग भी इस साजिश में शामिल हैं यह जांच एजेंसियों के लिए बड़ी बात है। खालिस्तान और आईएसआई की मिली भगत की बात जिस तरह सामने आई है उससे यही लगता है की भारत से सीधे मुकाबले में नाकामयाब पाकिस्तान अब खालिस्तान को आगे कर पंजाब में फिर आतंकवाद फैलाने की साजिश रचने में जुटा है। किसान आंदोलन को उसने इस साजिश को भुनाने का अच्छा मौका समझा। आईएसआई भारत की संप्रभुता और अखंडता को बाधित करने की साजिश हमेशा से रचती चली आ रही है। इस मामले में सरकारी एजेंसियों को खुले मन से जांच करने देनी चाहिए। संवेदनशील मामलों पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए।

दिशा रवि और ग्रेटा के चैट भी सामने आए हैं। जिसमें दिशा ने ग्रेटा से टूल किट को डिलीट करने की बात कही है। उसने कहा भी है कि यह मामला तूल पकड़ रहा है उसके खिलाफ गंभीर कानूनों के तहत कार्रवाई भी हो सकती है। भारत की जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई जिसकी वजह से दिशा रवि घबरा गई। ग्रेटा ने उसे पूरा भरोसा दिलाया था कि वह घबराए नहीं उस पर कोई आँच नहीं आएगी वह इस मामले में अपने वकीलों से बात कर रही है। दोनों के चैट से यह साफ होता है कि किसान आंदोलन की आड़ में टूलकिट के जरिए हिंसा फैलाने की साजिश रची गईं।

किसान आंदोलन में अगर विदेशी साजिश का हाथ है तो यह देश के लिए बेहद खतरनाक है। ‘टूलकिट’ के जरिए यह हिंसा फैलाने की बड़ी साजिश है। सरकार की जांच एजेंसियों को अपना काम करने देना चाहिए। साजिश बेनकाब होनी चाहिए। हमारे राजनेता हमेशा अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं। जांच सरकार के दबाब में नहीं होनी चाहिए। किसी निर्दोष को बालि का बकरा नहीं बनाया जाना चाहिए। जांच में अगर ‘टूलकिट’ जैसी साजिश साबित हो जाती है तो यह भारत की संप्रभुता एवं अखंडता के खिलाफ है।

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