भारत अब ‘बाज’ से रखेगा चीनी सैनिकों पर नजर

नई दिल्ली

पैनी नजर… आईटीबीपी जवानों को मिलेंगे अत्याधुनिक उपकरण, घाटी में बहुत नीचे तक की गतिविधियों को साफ देख सकेंगे

चीनी सैनिकों के दुस्साहस पर नजर रखने के लिए अब आईटीबीपी और इंटेलिजेंस एजेंसियां बाज तंत्र पर काम करेंगी। गश्त के दौरान आईटीबीपी कर्मियों को इस तरह के उपकरण मुहैया कराए जाएंगे, जिससे वे घाटी में बहुत नीचे तक की गतिविधियां साफ देख सकें। केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों ने उपकरणों का खुलासा न करने की शर्त पर बताया कि ये ‘बाज’ की तरह काम करेंगे।

चाहे कैसा भी मौसम हो, इनका काम जारी रहेगा। इन्हें ऊंचाई वाले इलाके में लगाया जाएगा। इसके अलावा गश्त में लगे जवानों को कुछ खास किस्म के उपकरण मुहैया कराए जा रहे हैं। अरुणाचल प्रदेश के साथ लगती सीमा पर 47 अतिरिक्त बीओपी तैयार करने का काम शुरू हो गया है। बीओपी और गश्त को लेकर नए मापदंड बनाए गए हैं। इसके अलावा आईटीबीपी को दो हेलीकॉप्टर दिए जाने की फाइल अब आगे सरक रही है। सूत्रों के अनुसार, इंटेलिजेंस एजेंसियों और सुरक्षा बलों के बीच तालमेल को और ज्यादा बेहतर करने की दिशा में काम शुरू हो गया है। अभी तक ये एजेंसियां अपने स्तर पर जानकारी जुटाना और उसके बाद तय नियमों के तहत उसे आपस में साझा करना जैसे पैटर्न पर काम करती थीं। इनके लिए अब एक नया पैटर्न तैयार किया गया है।

बॉर्डर सुरक्षा और पुख्ता की जाएगी

नए पैटर्न में पहली सूचना दो जगहों पर एक साथ जाएगी। सूचना के आदान-प्रदान में एजेंसी के साथ दूसरा पक्ष बॉर्डर गार्ड फोर्स को बनाया गया है। खासतौर पर, अरुणाचल प्रदेश में स्थित बीओपी का फासला कम कर दिया गया है। वहां पर अतिरिक्त जवानों की तैनाती की जा रही है। लद्दाख सेक्टर में भी कई जगहों पर नई बीओपी खड़ी कर उनके बीच की दूरी घटाई जा रही है। आईटीबीपी की कई बीओपी के बीच 20 किलोमीटर से लेकर डेढ़ सौ किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी रहती है, ऐसे में बॉर्डर सुरक्षा थोड़ी मुश्किल हो जाती है।

अपग्रेड वाहन खरीदी प्रक्रिया तेज

लद्दाख सेक्टर में भारतीय जवानों को लंबे समय के लिए तैयार करने का आदेश दिया गया है। वहां के मौसम में बेहतर मेडिकल रिपोर्ट वाले जवानों को विशेष गश्त का हिस्सा बनाया जाएगा। इस गश्त टीम में शामिल जवानों के पास कई तरह के उपकरण रहेंगे। अपग्रेड वाहन खरीदने की प्रक्रिया जो कि पहले से जारी है, उसे तेज कर दिया गया है। हेलीकॉप्टर के लिए पांच साल से फाइल इधर-उधर हो रही है, लेकिन वह मुकाम तक नहीं पहुंच सकी। किराये पर लेने की बात भी सिरे नहीं चढ़ी। अब कुछ उम्मीद नजर आ रही है।

 

 

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