कश्मीरियों को बाकी दुनिया से जोड़ रही ‘इंटरनेट एक्सप्रेस’

श्रीनगर

कश्मीर में पिछले पांच महीने से भी ज्यादा समय से इंटरनेट बंद है। ऐसे में लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए तरह-तरह के उपाय लगा रहे हैं। “इंटरनेट एक्सप्रेस” में नियमित यात्रा करना उनमें से एक है। 18 वर्षीय अबरार अहमद उन हजारों कश्मीरियों में से हैं, जो ठंड और बर्फ की परवाह ना करते हुए नियमित रूप से यात्रियों से भरी एक ट्रेन में घंटों यात्रा करते हैं, सिर्फ इसलिए कि वे इंटरनेट का उपयोग कर सकें।

बता दें कि कश्मीर में इंटरनेट पर बैन दुनिया की किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में इंटरनेट पर लगी सबसे लंबी बंदिश बन चुकी है। घाटी में बीते 162 दिनों से इंटरनेट बंद है। कश्मीरियों ने इस ट्रेन का नाम ही ‘इंटरनेट एक्सप्रेस’ रख दिया है। पिछले साल पांच अगस्त को जब केंद्र सरकार ने कश्मीर का विशिष्ट संवैधानिक दर्जा समाप्त कर दिया था और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांट दिया था, तब से वहां ब्रॉडबैंड और मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद हैं। 14 जनवरी को इन सेवाओं को आंशिक से बहाल किया गया, लेकिन अभी भी मोबाइल इंटरनेट सिर्फ जम्मू प्रांत के कुछ हिस्सों में बहाल हुआ है, कश्मीर में नहीं। कश्मीर में ब्रॉडबैंड इंटरनेट की इजाजत मिली तो है, लेकिन सिर्फ अस्पतालों, होटलों और यात्रा संबंधित संस्थानों में, और वो भी सिर्फ सरकार द्वारा पारित वेबसाइटों के लिए। बनिहाल जाने वाली ‘इंटरनेट एक्सप्रेस’ से उतरते ही लोग सीधे रुख करते हैं उन दुकानों का, जहां इंटरनेट उपलब्ध है। वहां उन्हें एक घंटे के ब्रॉडबैंड के लिए 300 रुपए तक देने पड़ते हैं। अहमद कहते हैं, “मैं इस अवसर को खो नहीं सकता।” उन्होंने लोगों से भरे हुए एक इंटरनेट कैफे में नौकरी के लिए एक ऑनलाइन आवेदन पत्र भरा है। वहां उनके जैसे दर्जनों लोग अभी कतार में हैं। अहमद कहते हैं, “मेरे परिवार में मेरे अलावा और कोई नहीं है जो मेरा और मेरे तीन छोटे भाई-बहनों का ख्याल रख सके।” उन्होंने यह भी बताया कि उनके पिता ने सड़क हादसे में अपना एक पैर गंवा दिया था, लिहाजा सारी जिम्मेदारी उन्हीं पर है।

घाटी को 2.4 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इंटरनेट और सोशल मीडिया के इस्तेमाल को मौलिक अधिकार करार दिया है। संयुक्त राष्ट्र ने भी 2016 में घोषणा की थी कि इंटरनेट एक मानवाधिकार है। लेकिन इसके बावजूद पिछले कुछ सालों में दुनिया भर में इंटरनेट को बंद कर देने की घटनाओं में वृद्धि हुई है।

भारत सरकार का भी कहना है कि उसे संचार व्यवस्था को बंद करना पड़ा ताकि कश्मीर में अशांति न फैले। कश्मीर में जारी अलगाववादी विद्रोह में 1989 से लेकर अभी तक 40,000 से भी ज्यादा जानें जा चुकी हैं। इस लॉकडाउन की कश्मीर को अगस्त से लेकर अभी तक 2.4 अरब डॉलर से ज्यादा की कीमत चुकानी पड़ी है।

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