क्या असम में नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध पर भारी पड़ रहा है बोडो समझौता?

विभव देव शुक्ला

नागरिकता संशोधन अधिनियम को अंतिम सूरत मिलने के बाद यह पहला ऐसा मौका है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम के दौरे पर जा रहे हैं। जब से नागरिकता संशोधन अधिनियम का ज़िक्र छिड़ा है तब से असम राज्य भी खूब सुर्खियों में है। असम के भीतर बड़े पैमाने पर होने वाले विरोध का एक बड़ा कारण नागरिकता संशोधन अधिनियम था लेकिन इस तरह के तमाम विरोध के बाद प्रधानमंत्री मोदी पहली बार असम के कोकराझार जा रहे हैं।

क्या असर है समझौते का
इस दौरे के साथ नागरिकता संशोधन अधिनियम के अलावा एक और खास बात है बोडो समझौता। 27 जनवरी को गृह मंत्री अमित शाह ने बोडो समझौता करवाया था, असम के मुख्यमंत्री सर्बानन्द सोनेवाल की मौजूदगी में यह समझौता हुआ था। समझौता होने के ठीक बाद नेशनल डेमोक्रेटिक फेडरेशन ऑफ बोडोलैंड ने समझौते पर हस्ताक्षर करके अलग बोडोलैंड की मांग छोड़ दी।
जिसके बाद सरकार ने कहा कि वह बोडो समुदाय के नेताओं और आम लोगों पर दायर मुकदमों की समीक्षा करेगी। इसका मतलब नागरिकता संशोधन अधिनियम और बोडो समझौते के बाद प्रधानमंत्री मोदी पहली बार असम के दौरे पर जा रहे हैं। जहाँ कुछ दिन पहले तक पूरे राज्य में सरकार के लिए जम कर विरोध देखने को मिला वहाँ आज माहौल पूरी तरह अलग है। इतने बड़े पैमाने पर हुए विरोध का मिजाज़ आज बदला हुआ नज़र आ रहा है।

5 लाख लोग अनुमानित
पूरे शहर में स्वागत के लिए पोस्टर और बैनर लगाए गए हैं। समाचार एजेंसी एएनआई पर एक वीडियो भी आया है जिसमें बोडो समुदाय के लोग खुशी से झूमते हुए नज़र आ रहे हैं। बीती शाम को कोकराझार में मिट्टी के दिये तक जलाए गए थे, जिसकी तस्वीर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्वीटर एकाउंट पर साझा की थी। प्रधानमंत्री मोदी दिन के 12:30 बजे कोकराझार में एक जनसभा को संबोधित करेंगे।
जनसभा में लगभग 5 लाख लोग अनुमानित हैं जिए असम में उनकी सबसे बड़ी जनसभाओं में एक माना जा रहा है। इस कार्यक्रम का कारण ही बोडो समझौता था, सरकार के इस निर्णय को बोडो समुदाय ने स्वीकार किया। नतीजतन समुदाय के लोगों ने कार्यक्रम के लिए इस पैमाने पर तैयारी की है, खुद बोडो समुदाय के लोगों ने इस आयोजन को अंतिम सूरत दी है। बेशक सरकार के इस कदम को बोडो समुदाय ने सहर्ष स्वीकार किया।

2800 से ज़्यादा मौतें
बीते महीने की 27 तारीख़ को गृह मंत्री अमित शाह ने असम के मुख्यमंत्री और नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड के साथ मिल कर बोडो समझौता कराया था। समझौता होने के बाद एनडीएफबी समेत तमाम संगठनों और उनके उग्रवादियों ने अपने हथियार डाल दिए। सरकार ने समझौते के दौरान उस इलाके के विकास के लिए 1500 करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया है।
पिछले कई दशकों से बोडो समुदाय ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपरी हिस्से में एक अलग राज्य की मांग कर रहा था। अलग राज्य की मांग के दौरान हुए संघर्ष में अब तक लगभग 2823 लोगों की मौत भी हो चुकी है। लेकिन केंद्र सरकार ने दशकों पुरानी अलग राज्य की मांग को समझौते के ज़रिये खत्म कर दिया।

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