आईटीबीपी के जवान जो बुलेटप्रूफ जैकेट पहनने वाले हैं वो चीनी रॉ मटेरियल से बना है

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

लद्दाख के गलवान में हुई भारत और चीनी सेनाओं के बीच झड़प के बाद अब भारत सतर्क हो गया है और आगे हालात की गंभीरता को भांपते हुए सख्त कदम उठा रहा है।

इसी बीच रक्षा मंत्रालय ने भी डिफेंस से जुड़ा सामान बनाने वाली कंपनियों को जल्द-से-जल्द 2 लाख बुलेटप्रूफ जैकेट्स और प्रोटेक्टिव गियर बनाने का काम सौंपा है। लेकिन अब इन्हीं इक्विपमेंट्स को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

इस जैकेट का इस्तेमाल आईटीबीपी के जवान भी करेंगे

दरअसल, गृह मंत्रालय जल्द ही सेना के लिए 50 हजार बुलेटप्रूफ जैकेट की खरीदारी करने वाला है। इस जैकेट का इस्तेमाल आईटीबीपी के जवान भी करेंगे जो लाइन ऑफ एक्चुएल कंट्रोल यानी एलएसी पर चीन से देश की रक्षा करते हैं।

अब दिक्कत ये है कि इसमें जो मटेरियल यूज़ किया जा रहा है वो चीन से आया हुआ है। अब सवाल यह है कि जो देश हमारे जवानों को धोखे से मार रहा उसके यहां की चीजें सेना को देना कितना सही है।

ओईएम डिफेंस उत्पाद के लिए चीन से कच्चा माल मंगाते हैं

भारत में ओरिजनल इक्विपमेंट मैन्युफैकचर्स (ओईएम) डिफेंस के उत्पाद तैयार करने के लिए चीन का कच्चा माल मंगाते हैं। लेकिन ऐसे समय में जब पूरे देश में चीन के सामान को लेकर बहिष्कार करने की मुहीम छिड़ी हुई है ऐसे में चीन से ही सेना की सुरक्षा के लिए कच्चा माल मंगाने को लेकर विवाद पैदा हो गया है।

बुलेटप्रूफ जैकेट के इस ऑर्डर पर सरकार असमंजस में है। सरकार को सेना के लिए जल्द बुलेटप्रूफ जैकेट भी चाहिए और यह भी पता चला है कि वेंडर चीन से माल ले रहा है। फिलहाल रक्षा मंत्रालय ने सोचा है कि 1.8 लाख नए बुलेटप्रूफ जैकेट का जो ऑर्डर पहले दिया गया था उसे ऐसे ही चलने दिया जाए।

अमेरिका, यूरोप का जैकेट दिखाकर कॉन्ट्रैक्ट ले लिया था

चीन और चीनी सामान का चौतरफा इस बारे में अब नीति आयोग के सदस्य और डीआरडीओ के पूर्व प्रमुख वीके सारस्वत ने दोबारा विचार करने का भरोसा दिया है। हालांकि चीन से भारत के डिफेंस की सुरक्षा से जुड़े कई अनुबंध चल रहे हैं और कुछ पर रोक लगा दी गई है ऐसे में एक नए कॉन्ट्रैक्ट को लेकर भारत को फिर से सोचना होगा।

समस्या यह है कि 2019 में वेंडर ने अमेरिका और यूरोप का जैकेट दिखाकर कॉन्ट्रैक्ट ले लिया और बाद में चीन से रॉ मटीरियल आयात कर उसे तैयार किया। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना है कि नए ऑर्डर में भी वेंडर जैकेट बनाने के लिए सबसे जरूरी हाई परफॉर्मेंस पॉलिथिन चीन से आयात कर सकता है।

639 करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा चीन की कंपनियों को गया है

इसको लेकर ईटी ने मार्च 2019 में एक रिपोर्ट भी छापी थी। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि इंडियन आर्मी की तरफ से जो 639 करोड़ रुपये जमा किए गए हैं उसका बड़ा हिस्सा चीन की कंपनियों को गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 40 फीसदी जैकेट मटीरियल का आयात चीन से किया गया था।

गलवान घाटी में हुई हिंसक भिड़ंत के बाद भारत में चीन और चीनी सामान को लेकर लोगों में रोष और भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। देशभर में चीनी सामान का विरोध, बहिष्कार किया जा रहा है।

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