जापान का अनोखा कृषि उत्सव जिसमें नंगे होते हैं लोग

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। बर्फ जैसा ठंडा पानी और उसमें लगभग न के बराबर कपड़े पहने हजारों लोग एकसाथ डुबकी लगा रहे हैं। आप भी सोच रहे होंगे कि लोगों को इस तरह नहाने की ऐसी क्या जरूरत पड़ गई।

असल में यह जापान के एक खास तरह के ‘नेकेड फेस्टिवल’ का नजारा है जिसका आयोजन हर साल फरवरी के तीसरे शनिवार को किया जाता है। इस इस अनोखे बाथ का आयोजन शनिवार को जापान के होंशु आइलैंड में हुआ था।

यह फेस्टिविल पुरुषों के लिए आयोजित होता है जिसमें अनोखी प्रतियोगिता भी रखी जाती है। इस साल भी बड़ी संख्या में पुरुषों ने हिस्सा लिया। इस दौरान उनके शरीर पर लंगोट (फंदोशी) और पांव में सफेद रंग के मोजे होते हैं। इस बाथ का मकसद युवा पीढ़ी में खेती के प्रति रूचि जगाना होता है।

सीएएन की रिपोर्ट के मुताबिक, ओकायामा टूरिजम बोर्ड की प्रवक्ता ने बताया, “हमें उम्मीद है कि वे भविष्य में इस परंपरा को आगे बढ़ाएंगे।”

कुछ लोगों के लिए, सैदई-जी (जो जापान में सातवें महान मंदिर के रूप में स्थापित है) को इस त्योहार का जन्म स्थान माना जाता है। लगभग 500 साल पहले, तीर्थयात्रियों को वर्ष के अंत में पुजारी से कुछ कागज़ के निशान मिलते थे। यह माना जाता था कि जो कोई भी एक को पाने में कामयाब होता है, उसके लिए साल अच्छा बीतता है और पुजारियों को अधिक से अधिक अनुरोध मिलना शुरू हो जाता है। इन ‘पेपर चार्म्स’ को बदल दिया गया था और आज ये पवित्र लकड़ी की छड़ी और विलो के बंडल हैं जो भीड़ में फेंक दिए जाते हैं।

परंपरा के तहत पुरुष इस फेस्टिवल के शुरुआती घंटों में मंदिर पर एक तरह का अनुष्ठान होता है जिसमें सारे पुरुष मंदिर के चारों तरफ दौड़ते हैं और ठंडे पानी से नहाकर खुद को पवित्र करते हैं। इसके बाद मंदिर की तरफ वापसी करते हुए उन्हें लकी स्टिक्स खोजनी होती है। जो कि मंदिर के पुजारी 100 अन्य छड़ी के साथ फेंकते हैं। बताया जाता है कि जब वे नहाकर जलकुंड से बाहर निकलते हैं तो शरीर पर जगह-जगह चोट के निशान होते हैं, लेकिन परंपरा के पालन के लिए वे हर साल इस उत्सव का हिस्सा बनते हैँ।

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