दिल्ली में एक और 1984 नहीं होने देंगे बोलने वाले जज का ट्रांसफर

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शनों में हिंसा, भड़काऊ बयानों और इस पर पुलिस कार्रवाई को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में अलग-अलग सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन बाग मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली के मौजूदा हालात पर सख्त टिप्पणी की थी। इस मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट के जज जस्टिस एस मुरलीधर ने पुलिस और सरकार को फटकार लगाई थी। अब उनका ट्रांसफर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट कर दिया गया है।

वे हाईकोर्ट में जजों के वरिष्ठता क्रम में तीसरे स्थान पर थे। कानून मंत्रालय ने बुधवार देर रात उनके तबादले का नोटिफिकेशन जारी किया। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे के साथ विचार-विमर्श के बाद यह फैसला लिया है।

जस्टिस मुरलीधर के ट्रांसफर के बारे में पहले भी दो बार चर्चा हो चुकी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के कुछ जजों के विरोध के बाद इसे रोक दिया गया था। उनके ट्रांसफर पर पहली बार दिसंबर 2018 में और फिर जनवरी 2019 में चर्चा हुई थी।

क्या कहा था जज ने?

जज के रूप में उन्होंने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिए थे कि वह मुस्तफाबाद के एक अस्पताल से एंबुलेंस को सुरक्षित रास्ता दे और मरीजों को सरकारी अस्पताल में शिफ्ट कराया जाए। इसके अलावा उन्होंने यह भी आदेश दिया था कि भड़काऊ बयानबाजी पर तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाए।

एक दिन पहले दिल्ली हिंसा को लेकर हो रही सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि हम कोर्ट और पुलिस की निगरानी में दूसरे 1984 के दंगों की इजाज़त नहीं दे सकते। हमे बहुत बहुत ज़्यादा सतर्क रहने की ज़रूरत है। कोर्ट ने कहा कि हमें आईबी के अफसर पर हमले की जानकारी मिली है। ये बेहद गंभीर है। इन चीज़ों पर बहुत ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है।

कोर्ट रूम में प्ले किया गया था कपिल मिश्रा का वीडियो

जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मैने सभी वीडियो नहीं देखे हैं। इस पर जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि मिस्टर तुषार मेहता, अगर आपने ये वीडियो ने नहीं देखे तो हम कोर्ट में प्ले कर सकते हैं। इस पर मेहता ने कहा कि इसकी कोई जरूरत नहीं है। कोर्ट रूम में कपिल मिश्रा और लक्ष्मीनगर के विधायक अभय वर्मा का वीडियो चलाया गया। कोर्ट ने अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा का भी वीडियो देखा।

इस दौरान एक वकील ने टोका कि ओवैसी और बाकी लोगों के भी वीडियो हैं। कोर्ट उन्हें भी देख ले, इस पर कोर्ट ने वकील को ना टोकने की बात कहते हुए कहा अगर कोर्ट को ज़रूरी लगेगा तो उन्हें भी देखा जाएगा। कपिल मिश्रा का वीडियो चलाते हुए जस्टिस मुरलीधर ने चिह्नित किया और कहा, “देखिए, वो (कपिल मिश्रा) तब बोल रहे हैं, जब डीसीपी उनके बगल में खड़े हैं।”

वहीं, इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस ने रातोंरात हाईकोर्ट जज के ट्रांसफर को लेकर मोदी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने ट्वीट किया, “बहादुर जज लोया को याद करो, जिनका ट्रांसफर नहीं हुआ था।”

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कहा कि रूटीन के तहत ट्रांसफर किया गया है। और ट्रांसफर की संस्तुति 12 फरवरी को ही हो गयी थी। जज से सहमति भी ली गयी थी।

जस्टिस मुरलीधर को दिल्ली हाईकोर्ट में 2006 में बतौर जज नियुक्त किया गया था। उनका कार्यकाल 2023 में पूरा होगा। 2018 में मुरलीधर ने 1984 सिख दंगों में शामिल रहे सज्जन कुमार को भी उम्रकैद का फैसला सुनाया था। जस्टिस मुरलीधर होमोसेक्सुअलिटी को डिक्रिमिनलाइज करने वाली दिल्ली हाईकोर्ट की बेंच का भी हिस्सा रहे थे।

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