अपने विचार दर्ज़ कराने के चलते कफ़ील खान मुंबई एयरपोर्ट पर उतरते ही दोबारा हुए गिरफ़्तार

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। बीते 29 जनवरी को दिन में जहां पहले बच्चों पर राजद्रोह का आरोप लगा कर उनके खिलाफ़ केस दर्ज़ किया गया वहीं रात में कफ़ील खान को फ़िर से गिरफ़्तार किया गया। ये वही कफ़ील हैं जिनको गोरखपुर त्रासदी में बच्चों को बचाने के लिए गिरफ़्तार किया गया था।

उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स ने ने डॉ. कफील खान को मुंबई से बीते रात गिरफ्तार कर लिया है। ये वही कफील खान हैं जिनको गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज से सस्पेंड कर दिया गया था। उनके ऊपर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 12 दिसंबर, 2019 को नागरिकता संशोधन कानून को लेकर भड़काऊ बयान देने का आरोप है। पिछली बार कफील खान को 2017 में बीआरडी कॉलेज में बच्चों की मौत के मामले में सस्पेंड कर दिया गया था।

खान के ऊपर आईपीसी की धारा 153-ए के तहत सिविल लाइन्स पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। उनके खिलाफ दर्ज शिकायत में कहा गया था कि छात्रों को संबोधित करने के दौरान खान ने बिना नाम लिए कहा कि ‘मोटाभाई’ सबको हिंदू या मुस्लिम बनना सिखा रहे हैं लेकिन इंसान बनना नहीं।

उन्होंने आगे कहा कि जब से आरएसएस का अस्तित्व हुआ है, उन्हें संविधान में भरोसा नहीं रह गया। खान ने कहा कि सीएए मुस्लिमों को सेकंड क्लास सिटिज़न बनाता है और एनआरसी लागू होने के साथ ही लोगों को परेशान किया जाएगा।

सहर पुलिस स्टेशन इंचार्ज शशिकांत माणे ने कहा, “डॉक्टर कफील को फिलहाल थाने में लाया गया है। उन्हें इंसपेक्टर बिजेंद्र शर्मा और इंसपेक्टर प्रमोद वर्मा ने गिरफ्तार किया है। आईजी एसटीएफ अमिताभ यश ने पुष्टि की कि उन्हें अलीगढ़ विरोध के दौरान आपत्तिजनक बयान में गिरफ्तार किया गया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि एसटीएफ डॉ. खान को आज उत्तर प्रदेश लेकर जाएगी।”

इस पर कफ़ील खान का कहना है, “मुझे गोरखपुर के बच्चों के मृत्यु त्रासदी में क्लीन चिट मिल गया था। लेकिन अब मुझे फिर से इन सब का एक चेहरा बनाया जा रहा है तथा मुझे फंसाने की कोशिश की जा रही है। मैं महाराष्ट्र पुलिस से आग्रह करता हूँ कि मुझे यहाँ महाराष्ट्र में ही रहने दिया जाए क्योंकि उत्तर प्रदेश की पुलिस पर मुझे कतई भरोसा नहीं है।”

खान ने आगे कहा था, ‘यह लड़ाई हमारे अस्तित्व की लड़ाई है। हमें लड़ना होगा।’ उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस के स्कूलों में बच्चों को बताया जाता है कि दाढ़ी रखने वाले लोग आतंकवादी होते हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि सीएए लाकर सरकार यह दिखाना चाहती है कि भारत एक देश नहीं है। एफआईआर में कहा गया कि खान ने शांतिपूर्ण माहौल को भंग करने की कोशिश की।

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