जामिया की घटना पर स्व. चन्दन गुप्ता की माँ ने कहा आखिर हिंसा में ही हमने अपना बेटा खोया है

विभव देव शुक्ला

26 जनवरी देश की आवाम के लिए एक अहम दिन है। ऐसा दिन जिसके लिए देश की आबादी जज़्बात भी रखती है और सम्मान भी। आखिर देश को सामाजिक और लोकतान्त्रिक बुनियाद देने वाला संविधान इसी दिन तैयार होकर लागू हुआ था। लेकिन साल 2018 में इस दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने देश की लोकतान्त्रिक तस्वीर पर सबसे नकारात्मक रंग छोड़ा।

क्या कहते हैं चन्दन गुप्ता के माता-पिता
उत्तर प्रदेश के कासगंज इलाके में तिरंगा यात्रा निकालते हुए चन्दन गुप्ता नाम के युवक की हत्या कर दी गई थी। 30 जनवरी को जामिया मिलिया इस्लामिया में एक युवक ने सीएए का विरोध कर रहे लोगों पर कट्टा चला दिया था। गोली वहाँ पढ़ने वाले शादाब नाम के छात्र को लगी थी। युवक ने गोली चलाने के पहले अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर कई बातें लिखी थीं। उसका कहना था कि यह सब उसने चन्दन गुप्ता की मौत का बदला लेने के लिए किया है। इस घटना पर चंदन गुप्ता के परिजनों ने प्रतिक्रिया दी है।

नफ़रत के बदले नफ़रत
चन्दन की माँ संगीता गुप्ता ने सबसे पहले जामिया में हुई घटना की आलोचना की है। उनका कहना है कि मेरे हिसाब से जामिया में गोली चलाने की घटना सरासर गलत और निंदनीय है। हम एक ऐसे समाज का हिस्सा हैं जो अहिंसक है, ऐसे में यहाँ हर तरह के विरोध शांति के साथ होने चाहिए। मैंने हिंसा के चलते ही अपना बेटा खोया है इसलिए मैं ऐसी किसी घटना को सही नहीं कह सकती।
चन्दन के परिवार के एक और सदस्य ने कहा जामिया में जो कुछ भी हुआ वह पूरी तरह गलत है। इस तरह की घटनाओं का नतीजा महज़ इतना है कि आने वाले समय में इस तरह के और लोग तैयार होते हैं। लिहाज़ा इस तरह की सोच को रोकना ही होगा तभी हालातों में सुधार होने की गुंजाइश बनेगी। आखिर नफ़रत के बदले नफ़रत का अंत अच्छा कैसे हो सकता है।

प्रदर्शन के दौरान हुई घटना
देश की राजधानी स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र सीएए और एनआरसी का विरोध करते हुए राजघाट की तरफ आगे बढ़ रहे थे। तभी अचानक से दो नारे सुनाई दिए, ‘दिल्ली पुलिस ज़िन्दाबाद और वंदे मातरम।’ इसके पहले कि मौजूद लोगों में कोई कुछ समझ आता नारे लगाने वाले युवक के हाथ में हथियार नज़र आया। हथियार लहराते और नारे लगाते हुए युवक आगे बढ़ा और उसने गोली चला दी।
गोली जामिया मिलिया इस्लामिया में पढ़ने वाले एक शादाब नाम के छात्र को लगी, जिसके बाद पुलिस ने युवक को हिरासत में ले लिया। गोली चलाने वाले और गोली चलाने के पीछे दबी भावना, दोनों की खूब आलोचना हो रही है। अमूमन पूरी बहस ही इस बिन्दु के आस-पास घूमती है कि प्रदर्शन करने वाले आम लोगों पर गोली क्यों?

रामभक्त गोपाल
गोली चलाने वाले युवक की फेसबुक प्रोफाइल भी है और वहाँ उसने अपना नाम लिखा था ‘रामभक्त गोपाल’। नाम से इतना साफ़ है कि गोपाल स्वघोषित श्रीराम का भक्त है, उसकी राम में आस्था और भरोसा है। साथ ही उसने गोली चलाने के पहले अपने फेसबुक से तमाम बातें भी लिखीं जिसमें सबसे ज़्यादा गौर करने लायक बात थी “ध्यान दें!! कृपा करके 31st तारीख़ तक मेरी पोस्टों को नज़र अंदाज़ न करें।” युवक ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि वह ऐसी किसी हरकत को अंजाम दे सकता है।

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