रानीपुरा के नन्हे सुल्तान से सीखें कोरोना से अकेले लड़कर जीतना

विनोद शर्मा | इंदौर

पहले दादी पॉजिटिव हुईं, फिर उनसे संक्रमित हुआ 3 साल का मासूम, 22 दिन बाद दोनों स्वस्थ

दुनिया को हिलाकर रख देने वाले कोरोना वायरस से कैसे लड़ना है, उससे कैसे जीतना है, यह सीखना है तो तीन साल के उस सुल्तान से सीखिए जो 22 दिन महामारी से मुकाबला करने के बाद मंगलवार को जंग जीतकर घर लौटा। सुल्तान के घर पहुंचने पर न सिर्फ परिवार ने, बल्कि पूरे मोहल्ले ने उसका स्वागत किया।

मंगलवार को अरबिंदों अस्पताल से 41 मरीज डिस्चार्ज हुए। इनमें पाथीबाजार रानीपुरा निवासी फरीदा बी (60 साल) और उनका तीन साल का पोता सुल्तान अंसारी भी शामिल है। सबसे पहले दादी पॉजिटिव मिली थी। तकरीबन एक महीने पहले फरीदा बी की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। जिसके बाद उन्हें अरबिंदों शिफ्ट कर दिया था। जब परिवार के बाकी लोगों की सैंपलिंग हुई तो उसमें सुल्तान की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। हालांकि उसमें कोरोना के लक्षण नहीं दिखे थे।

सुल्तान को उपचार के लिए अरबिंदों में भर्ती किया गया, जहां दादी पहले से भर्ती थी। दोनों के रूम अलग थे। इसीलिए मां नसरीन ने तय किया कि वह सुल्तान के साथ अस्पताल में ही रहेंगी। दूसरी तरफ परिवार के बाकी लोगों को सरवटे क्षेत्र के एक होटल में क्वारेंटाइन किया गया था। दो दिन पहले फरीदा और सुल्तान के सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। सोमवार को रिपोर्ट नेगेटिव आई।

अस्पताल में दोनों वक्त दूध मिला, केक भी खाया

सुल्तान के पिता मोइनुद्दी अंसारी ने बताया कि महामारी से पूरा परिवार बिखर गया था। खुदा का शुक्र है आज सब फिर एक छत के नीचे हैं। अंसारी ने बताया कि सुल्तान अभी स्कूल भी नहीं जाता है। उसकी तोतली बोली सुनने के लिए कान बेताब हो गए थे। अस्पताल में दादी-पोते का ध्यान रखा गया। सुल्तान को दोनों वक्त दूध मिला। कई बार अस्पताल ने केक भी खिलाया। डॉक्टर-नर्स सभी ने उसे प्यार दिया।

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