कांग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्‍यक्ष के खिलाफ़ पार्टी के ही 23 नेताओं का ‘लेटर बम’ जिसमें की गई इस्तीफे की मांग

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

कांग्रेस वर्किंग कमेटी की आज अहम बैठक जारी है। इसमें पार्टी की अंतरिम अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने अपने पद से इस्‍तीफे की पेशकश की है।

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस में 23 नेताओं की ओर से लिखी चिट्ठी के पीछे 2 नेताओं का हाथ बताया जा रहा है। फिलहाल चर्चा इस बात की है कि कांग्रेस का अगला अध्यक्ष कौन होगा? क्योंकि राहुल और प्रियंका गांधी पहले से ही ये जिम्मेदारी लेने से इनकार कर रहे हैं।

इस लेटर पर बड़े नेताओं के हस्ताक्षर हैं

दरअसल अनुमान लगाया जा रहा है कि इन दोनों का राज्यसभा में कार्यकाल खत्म हो रहा है और इनके मन में संशय था कि इन्हें दोबारा पार्टी की ओर से राज्यसभा का टिकट दिया जाएगा।

अपनी सदस्यता बरकरार रखने के लिए इन दोनों ने महाराष्ट्र में एक पार्टी से भी बात कर ली थी। इसके बाद दोनों ने दबाव बनाने के लिए सोनिया गांधी की नेतृ्त्व पर एक तरह से सवाल उठा दिया और यह ‘लेटर बम’ इसी का नतीजा है।

मीडिया के जानकारी के मुताबिक पांच पन्नों की इस चिट्ठी में कपिल सिब्बल, शशि थरूर, गुलाम नबी आजाद, पृथ्वीराज चह्वाण, विवेक तनखा, आनंद शर्मा सहित कई और भी बड़े नेताओं के हस्ताक्षर हैं।

संगठनात्मक चुनाव कराने की भी मांग की गई है

जानकारी के मुताबिक इस चिट्ठी में एक पूर्णकालिक और प्रभावी नेतृत्व की मांग की गई है। लेकिन इसके साथ भी एक अहम बात और लिखी गई है जिसमें कहा गया है कि पार्टी को ‘आत्मवलोकन’ और शक्तियों की विकेंद्रीकरण, राज्य की इकाइयों का सशक्तिकरण और हर स्तर पर संगठनात्मक चुनाव कराने की भी मांग की गई है।

पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी ने राहुल गांधी से कहा कि वह अपने फैसले पर दोबारा विचार करें। राहुल गांधी से कांग्रेस अध्यक्ष ना बनने के फैसले पर दोबारा मंथन करने को कहा गया। सभी प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने सोनिया गांधी से पद पर बने रहने की मांग की है।

गांधी परिवार ही पार्टी को एकजुट रख सकता है

23 कांग्रेस नेताओं की ओर से सोनिया गांधी को लिखा पत्र सामने आने के बाद राहुल गांधी ने इन सभी 23 नेताओं की आलोचना की है। राहुल गांधी ने कहा है कि इन सभी नेताओं की बीजेपी से साठगांठ हैं। हालांकि कांग्रेस की तरफ से कहा गया है कि राहुल गांधी ने ऐसी कोई बात नहीं कही है।

इस पत्र की खबर सामने आने के साथ ही पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ एवं युवा नेताओं ने सोनिया और राहुल गांधी के नेतृत्व में भरोसा जताया और इस बात पर जोर दिया कि गांधी परिवार ही पार्टी को एकजुट रख सकता है।

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