भगवान गणेश का प्रतीक है स्वास्तिक, दूर करता है वास्तुदोष

वैदिक ऋषियों ने अपने आध्यात्मिक अनुभवों के आधार पर कुछ विशेष चिन्हों की रचना की है. जिनका सनातन धर्म में विशेष महत्व है. ऐसा ही एक चिन्ह है, स्वास्तिक, जिसे भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है. सनातन धर्म में हर शुभ या मंगल कार्य करते समय स्वास्तिक बनाया जाता है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं स्वास्तिक और भगवान गणेश जी से कैसा नाता है और यह वास्तुदोष कैसे दूर करता है.

भगवान और स्वास्तिक का संबंधशास्त्रों का अगर हम अध्ययन करें तो पता चलता है कि स्वास्तिक परमब्रह्म, विघ्नहर्ता व मंगलमूर्ति भगवान गणेश का साकार रूप है. स्वास्तिक का बायां हिस्सा ‘गं’ बीजमंत्र होता है, जिसे भगवान गणेश का स्थान माना जाता है. इसमें जो चार बिंदियां होती हैं, उनमें गौरी, पृथ्वी, कूर्म यानी कछुआ और अनंत देवताओं का वास माना जाता है. वेद भी स्वास्तिक को भगवान गणेश का स्वरूप मानते हैं. कहा जाता है, जिस स्थान पर स्वास्तिक बनाया जाता है, वहां भगवान गणेश स्वयं वास करते हैं.

स्वास्तिक से बनते हैं बिगड़े कार्य अगर आपके कार्य बनते-बनते रुक जाते हैं, व्यवसाय में नुकसान हो रहा है. नौकरी में पदोन्नति नहीं पा रही है, तो स्वास्तिक का उपाय इन सारी समस्याओं का दूर करता है. गुरुवार के दिन ईशान कोण को गंगाजल से धोकर वहां पर सूखी हल्दी से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं. उसके बाद पंचोपचार पूजा करें. साथ ही आधा तोला गुड़ का भोग लगाएं. इसके अलावा कार्यस्थल पर उत्तर दिशा में हल्दी का स्वास्तिक बनाएं. ऐसा करने से सारे रुके हुए कार्य पूर्ण होने लगेंगे.

घर आती है सुख-समृद्धि स्वास्तिक को सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. यह घर में आने वाली सभी नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करता है. वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार पर भगवान गणेश एवं स्वास्तिक का चित्र बनाने से घर में सुख समृद्धि बनी रहती है और धन-धान्य की कमी नहीं होती है.

काले स्वास्तिक का अपना ही महत्व वैसे तो स्वास्तिक लाल या पीले रंग का बनाया जाता है, लेकिन आपको बता दें कि काले रंग का स्वास्तिक का अपना अलग महत्व है. कोयले से बना स्वास्तिक बुरी नजर से बचाने के साथ ही नकारात्मक ऊर्जा और भूत-प्रेत आदि को घर में प्रवेश करने से रोकता है. स्वास्तिक बनाते समय एक बात का विशेष ध्यान रखें कि किसी भी गंदी जगह या शौचालय के आस-पास स्वास्तिक न बनाएं. अन्यथा घर में दरिद्रता के साथ-साथ क्लेश का भी सामना करना पड़ता है.

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