विश्व भारती विश्वविद्यालय में भी जेएनयू की तरह कुछ नकाबपोशों ने किया हमला

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। अगर छात्र अपनी बात रखते हैं तो बहुत आसान है उन छात्रों को चुप कराना उन पर नकाबपोशों से हमला करवा दीजिये। हमलों की चपेट में पहले जामिया यूनिवर्सिटी बाद में जेएनयू अब विश्वभारती विश्वविद्यालय।

बुधवार की रात को विश्व भारती विश्वविद्यालय में भी छोटे पैमाने पर जेएनयू जैसी घटना हुई। यहां कथित तौर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के समर्थकों ने बुधवार रात को चेहरा ढंक कर वामपंथ समर्थक छात्रों पर हमला किया।

पुलिस ने बुधवार देर रात हुए हमले के आरोप में एबीवीपी के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इस हमले में एसएफआई से जुड़े स्वप्निल मुखर्जी और फाल्गुनी पान नामक दो छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

इस हमले में गंभीर रूप से घायल दो छात्र फ़िलहाल अस्पताल में हैं। तृणमूल कांग्रेस ने इसके लिए भाजपा और एबीवीपी की आलोचना की है। लेकिन एबीवीपी ने इस घटना में अपना हाथ होने से इनकार किया है।

घायल छात्रों को एक स्थानीय अस्पताल में दाखिल कराया गया है। इस हमले के बाद परिसर में आक्रोश है। पुलिस ने बताया कि बुधवार को हुए हमले के आरोप में एबीवीपी के अचिंत्य बागदी और शब्बीर अली को गिरफ्तार किया गया है। ये लोग पहले तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद के सदस्य थे।

सीपीएम से जुड़े एसएफआई और आल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (एडसो) ने इस हमले के लिए एबीवीपी को ज़िम्मेदार ठहराया है। इन दोनों संगठनों ने कहा कि स्वपन दासगुप्ता के घेराव की घटना का बदला लेने के लिए ये हरकत की गई है। एसएफआई नेता स्वप्निल मुखोपाध्याय ने बताया कि बुधवार देर रात एबीवीपी के लोगों ने कुछ बाहरी लोगों को बुलाकर हमला करवाया।

घायल छात्रों का आरोप है कि एबीवीपी के शब्बीर अली और अचिंत्य बागदी ने उन पर हमला किया। लेकिन बागदी ने इस आरोप को निराधार बताया है। बागदी का कहना है, “मैं एबीवीपी का सदस्य ही नहीं हूं, कल परिसर में हंगामे की ख़बर के बाद हमलोग भीतर गए थे। लेकिन बाद में पता चला कि एसएफआई के दो गुटों में ही मारपीट हुई है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि देर रात विश्वविद्यालय के कुलपति के वाहन में ही सवार होकर एबीवीपी के लोग परिसर में दाखिल हुए थे।

बीते 8 जनवरी को वाम संगठनों के देशव्यापी हड़ताल को विश्वविद्यालय के वाम-समर्थित छात्र संगठनों ने समर्थन दिया था। इससे एबीवीपी के लोग नाराज थे। यही नहीं, उसी दिन विश्वविद्यालय परिसर में भाजपा के राज्यसभा सांसद स्वप्न दासगुप्ता ने सीएए व एनआरसी पर सेमिनार को संबोधित किया था। सेमिनार के मुख्य वक्ता दासगुप्ता को वाम समर्थित छात्र संगठनों ने काला झंडा दिखाया और उन्हें चार घंटे तक एक कमरे में बंधक बनाए रखा था।

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