कांग्रेस छोड़ भाजपा में आनेवाले नेताओं की सूची लंबी, कई राज्यों में हैं मंत्री

नई दिल्ली

राजनीति में न तो कोई स्थायी दुश्मन होता है और न ही कोई स्थायी मित्र। इस कहावत को कांग्रेस के दिग्गज युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चरितार्थ कर दिया है। उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया।

हालांकि, उन्हें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी का करीबी माना जाता था। सिंधिया से पहले कांग्रेस को छोड़ भाजपा में शामिल होने वाले कांग्रेसी नेताओं की लंबी फेहरिस्त है। इनमें कृष्णा तीरथ, सतपाल महाराज, जसुभाई बराड, डी. पुरंदेश्वरी, जगदंबिका पाल, सुरेश कोटादिया, विट्ठल राडदिया और उनके बेटे जैसे दर्जनों नेता शामिल हैं। दरअसल, लोकसभा चुनाव 2014 में बीजेपी की जबरदस्त जीत और कांग्रेस की बुरी तरह हार के बाद नेता ही नहीं कई सहयोगी दलों ने भी देश की सबसे पुरानी पार्टी से किनारा कर लिया था। इनमें सपा, बसपा, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके शामिल हैं।

उत्तराखंड में मंत्री हैं सतपाल महाराज

धार्मिक गुरु सतपाल महाराज ने अपना राजनीतिक करियर कांग्रेस के साथ शुरू किया था। उत्तराखंड में बड़ी तादाद में उनके समर्थक हैं। उन्होंने मार्च 2014 में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कांग्रेस से किनारा कर भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2017 में वह भाजपा के टिकट पर जीते। फिलहाल वह उत्तराखंड सरकार में पर्यटन, संस्कृति और सिंचाई मंत्री हैं।

मोदी मोह में चावड़ा ने भी छोड़ी थी कांग्रेस

गुजरात के साबरकांठा जिले की हिम्मतनगर सीट से विधायक रहे राजेंद्र सिंह चावड़ा ने 2013 में यह कहते हुए कांग्रेस से नाता तोड़ लिया कि वह नरेंद्र मोदी को देश का प्रधानमंत्री बनते हुए देखना चाहते हैं। साथ ही कहा था कि इस समय कांग्रेस के पास जीतने लायक कुछ भी नहीं है। चावड़ा ने अपने साथ 1,500 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी भाजपा में शामिल कराया था।

एनटीआर की बेटी भी हैं भाजपा में

दिग्गज कांग्रेसी नेता एनटी रामा राव की बेटी और पूर्व केंद्रीय मंत्री डी. पुरंदेश्वरी तेलंगाना मुद्दे पर कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में शामिल हो गई थीं। उन्होंने 7 मार्च 2014 को भाजपा का दामन थामा और उसी साल हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर राजमपेट से हार गईं। इस समय वह भाजपा महिला मोर्चा की प्रभारी हैं। साथ ही कर्नाटक भाजपा की सह-प्रभारी भी हैं।

कृष्णा तीरथ को नहीं मिल पाई सफलता

दिल्ली चुनाव 2015 से पहले कांग्रेस को झटका देते हुए कृष्णा तीरथ भाजपा में चली गईं। उन्होंने 19 जनवरी 2015 को भाजपा ज्वाइन की। वह भाजपा के टिकट पर पटेल नगर सीट से चुनाव लड़ीं और हार गईं। इसके बाद मार्च 2019 में उन्होंने कांग्रेस में वापसी की। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 में वह पटेल नगर सीट से कांग्रेस के टिकट पर फिर मैदान में उतरीं और तीसरे नंबर पर रहीं।

गुजरात सरकार में मंत्री हैं जयेश राडदिया

जरात के दिग्गगज कांग्रेसी नेताओं में शुमार विट्ठल राडदिया और उनके बेटे जयेश राडादिया ने भी कांग्रेस पर पाट कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए भाजपा ज्वाइन कर ली थी। विट्ठलभाई राडदिया पांच बार विधायक और दो बार सांसद रहे। उनका 29 जुलाई 2019 को निधन हो गया। उनके बेटे जयेश राडदिया इस समय गुजरात सरकार में मंत्री हैं। वह भाजपा के टिकट पर जेतपुर सीट से गुजरात विधानसभा पहुंचे। इनके अलावा गुजरात के पूर्व उपमुख्यमंत्री नरहरि अमीन भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे।

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