300 साल में पहली बार बिना भक्तों के निकलेंगे महाकाल

प्रजातंत्र ब्यूरो | उज्जैन

उज्जैन सवारी लाइव…महाकाल की सवारी का फेसबुक-यूट्यूब और चैनलों पर होगा प्रसारण

सावन-भादो मास की बाबा महाकाल की सवारी सोमवार दोपहर 4 बजे महाकाल मंदिर से बिना भक्तों के निकलेगी। कोरोना महामारी को देखते हुए इस बार प्रशासन ने भक्तों को सवारी से दूर रखने का फैसला किया है। पहली बार सवारी को केवल फेसबुक, यूट्यूब और स्थानीय चैनलों पर लाइव दिखाने की व्यवस्था की गई है। सवारी को रोचक बनाने के लिए कमेंट्री भी की जाएगी। शैलेंद्र व्यास (स्वामी मुस्कुराके) यह कमेंट्री सुनाएंगे। नए सवारी मार्ग को रविवार को बैरिकेडिंग कर बंद कर दिया गया।

कोरोना ने उज्जैन में शुरूआती दौर में कहर ढा दिया था। मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण जिला रेड जोन में था। जून में ही हालात सुधरे हैं, जुलाई में यह ऑरेंज जोन में है। यह दौर बारिश का भी है और डब्ल्यूएचओ की चेतावनी भी है कि इस समय संक्रमण तेजी से बढ़ सकता है। लिहाजा प्रशासन कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं है। सवारी निकलने का सबसे पुराना प्रमाण 2100 साल पुराना शिलालेख है। 300 साल पहले सिंधिया वंशजों ने सवारी को शाही स्वरूप दिया था।

ऐसे निकलेगी सवारी, पहली बार लाइव कमेंट्री भी होगी

1. सवारी मार्ग के दोनों तरफ बैरिकेडिंग की गई है। यहां आम आदमी का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहेगा। केवल आमंत्रित ही सवारी में शामिल होंगे और वह भी पूरी ऐहतियात से। मसलन, उन्हें मास्क लगाना अनिवार्य होगा। सवारी मार्ग को पालकी निकालने से पहले डिसइन्फेक्ट भी किया जाएगा।

2. सभा मंडप में दोपहर चुनिंदा आमंत्रित गण, पुजारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पूजन होगा। ‘गॉड ऑफ ऑनर’ देकर सवारी की शुरुआत होगी। यहां से पालकी बाहर आएगी और नए रूट से रामघाट की तरफ रवाना होगी। नया रूट बड़े गणेश के सामने, हरसिद्धी चौराहा, सिद्धाश्रम, रामघाट रहेगा। रामघाट पर पूजन होगा। यहां से सवारी की वापसी होगी। हरसिद्धी पाल, हरसिद्धी मंदिर के सामने, बड़े गणेश से होते हुए पालकी फिर से मंदिर पहुंचेगी।

परंपरा का पालन होना ही पर्याप्त

कोरोना काल को देखते हुए भी महाकाल सवारी की परंपरा का निर्वहन होना जरूरी है। उज्जैन की भौगोलिक स्थिति पूरी एवं अन्य जगहों से बेहद अलग है। यहां चौड़ी सड़कें हैं और लोग भी संयमित व्यवहार करते हैं। महाकाल सवारी का परंपरागत मार्ग बेहद संकरा है। यहां लोग पालकी को छूने का प्रयत्न करते हैं। ऐसे में संक्रमण ज्यादा फैल सकता है। लिहाजा प्रशासन का फैसला सही है।
पंडित प्रदीप पुजारी, महाकाल मंदिर

गाइडलाइन के अनुसार ही सारी व्यवस्था

केंद्रीय गृह मंत्रालय की अनलॉक 0.2 गाइडलाइन के अनुसार किसी भी धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं की भीड़ जमा नहीं होनी चाहिए। सवारी की व्यवस्था उसी अनुसार की गई है। कोरोना का संक्रमण अभी खत्म नहीं हुआ। इस वजह से गाइडलाइन के अनुसार सभी सतर्कता बरती जा रही है।
आशीष सिंह, उज्जैन कलेक्टर।

 

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