आईसीयू से घर लौटे मंदसौर के ट्रिपल बेबी कोरोना वारियर्स

ब्यूरो | मंदसौर

मां की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर तीनों बच्चे कोविड नियमों से आईसीयू में थेे

पुरानी कहावत ‘जाको राखे साइयां मार सके ना कोय’ मंदसौर के ट्रिपल बेबी कोरोना वारियर्स पर सटीक साबित हुई है। दरअसल, जिला अस्पताल में करीब 10 सालों के बाद ऐसा भी मौका आया कि महिला ने एक साथ 3 बच्चों को जन्मा हो। सीतामऊ तहसील के मानपुरा गांव निवासी महिला प्रसव के वक्त ही कोरोना पॉजिटिव थीं, इससे भी बड़ी चुनौती यह थी कि तीनों नवजातों का वजन आदर्श मानक कहे जाने वाले 2.5 किलोग्राम से भी कम था। ट्रिपल बेबी में एक का वजन 1 किलो 580 ग्राम था और शेष दोनों का वजन एक समान 1 किलो 280 ग्राम ही था।

जिला अस्पताल के एसएनसीयू प्रभारी डॉ. प्रकाश कारपेंटर और उनके स्टॉफ ने चुनौती को हाथ में लिया और कोविड नियमों के तहत बच्चों की मां को प्रोटोकॉल के तहत जीएनएम सेंटर में उपचार के लिए भेजा। साथ ही तीनों बच्चों का भी टेस्ट कराया, जो नेगेटिव रहा। कम वजन और कमजोर सेहत के कारण तीनों बच्चों को 18 दिन एसएनसीयू में उपचार पर रखा। पूरे स्टॉफ ने दिन-रात एक कर बच्चों की सेहत पर लगातार निगरानी रखी। आखिरकार, खुशी वाला पल भी आया और शनिवार 12 सितंबर को इन बच्चों की मां पूरी तरह स्वस्थ्य होकर आई और तब तक स्वस्थ हो चुके तीनों बच्चों को अपने साथ ले गई। अस्पताल प्रबंधन ने सभी को डिस्चार्ज किया। बच्चे के पिता लखन कहते हैं, ‘डॉक्टर तो भगवान का रूप होते हैं, ऐसा सुना था, लेकिन मंदसौर जिला अस्पताल में डॉ. प्रकाश कारपेंटर और उनकी टीम ने जो हमारे लिए किया, सब कुछ सच में साबित भी हुआ।

एसएनसीयू स्टॉफ के सेवाभाव की सीएमएचओ ने की प्रशंसा

एक सच ये भी है कि एक साथ जन्म लेने वाले 3 बच्चों में सभी का बचना कम ही संभव हो पाता है, लेकिन कम वजन और मां कोरोना संक्रमित होने से यह केस कुछ अलग था। जिला अस्पताल के एसएनसीयू स्टॉफ ने गंभीर हालत वाले इन तीनों बच्चों की जान बचाई। इस जज्बे की प्रशंसा करते हुए सीएमएचओ डॉ. केएल राठौर ने कहा कि कोरोना संक्रमित महिला के तीनों बच्चों की स्थिति ठीक नहीं थी, इसके बाद भी पूरे स्टॉफ ने दिन-रात एक कर सभी का जीवन बचाया, यह प्रशंसनीय है।

 

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