मप्र के जज पर यौन उत्पीड़न का आरोप खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- जजों पर आरोप लगाना चलन बन गया है

मांगीलाल चौहान | इंदौर

सीजेआई बोबडे ने कहा- जब कुछ सही होना होता है तो लोग याद करने लगते हैं कि वह कितना बुरा व्यक्ति था

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के एक वरिष्ठ जिला न्यायाधीश पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों के चलते उनके खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने न्यायाधीश की याचिका पर नोटिस भी जारी किया है। मामला 2018 का है। एक महिला न्यायिक अधिकारी ने जिला न्यायाधीश पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना व जस्टिस वी रामासुब्रमण्यन की पीठ ने जिला न्यायाधीश की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए कहा कि न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराना एक प्रवृत्ति बन गया है और यह एक अपमानजनक व्यवहार है। जिला जज की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट आर बालासुब्रमणियम ने कहा कि जिस न्यायाधीश पर कथित आरोप लगाए गए थे, उन्होंने वास्तव में 32 साल की बेदाग सेवा की और उनको उच्च न्यायालय में जज नियुक्त करने के बारे में विचार हो रहा था। जो हुआ, वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। फिर अचानक 2018 में यह शिकायत सामने आई। वह इस साल सेवानिवृत्त होने के लिए तैयार हैं और उन्हें शर्मिंदगी से गुजरना पड़ रहा है। जून में, पीठ ने जिला न्यायाधीश से कहा था कि वह पहले रिट याचिका के साथ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएं। हाईकोर्ट द्वारा राहत देने से इनकार करने के बाद शीर्ष अदालत में फिर से एक नई याचिका दायर की गई थी।

ये है मामला

मप्र के एक वरिष्ठ जज ने एक महिला न्यायिक अधिकारी द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को खत्म करने की मांग करते हुए एडवोकेट सचिन शर्मा के जरिये याचिका दायर की है। जज के खिलाफ लिंग संवेदनशील आंतरिक शिकायत समिति के समक्ष मार्च 2018 यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज की गई थी। दलील दी गई है कि जो रिपोर्ट सामने आई है, उसमें कानून का कोई जनादेश नहीं है क्योंकि यौन उत्पीड़न कार्यस्थल अधिनियम, 2013 के अनुसार पक्षकारों के बीच सुलह हो गई थी। शिकायतकर्ता द्वारा एक सुलह आवेदन प्रस्तुत किए जाने के बाद आंतरिक जांच समिति के पास वर्तमान मामले में जांच करने के लिए कोई शक्ति निहित नहीं है। दलीलों में यह भी कहा गया है कि न्यायाधीश के खिलाफ आरोप उस समय लगाए गए थे, जब याचिकाकर्ता की पदोन्नति पर विचार किया जाना था।

ऐसा अब हमारे सिस्टम में नियमित होता है। जब कुछ सही होना होता है, तो सभी चीजें शुरू हो जाती हैं। लोग याद करने लगते हैं कि वह कितना बुरा व्यक्ति है? क्या करें? यह अब एक चलन बन गया है। अब एक अभ्यास बन गया है।
– एसए बोबडे, सीजेआई

 

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