मुरलीधर राव एक्शन में… कार्यकर्ताओं को शोकाज नोटिस

बैठक में अपेिक्षत कार्यकर्ताओं की अनुपस्थिति देख गुस्सा हुए भाजपा प्रदेश प्रभारी, गैर हाजिरी देखिए… 85 वार्ड में से केवल 25 पार्षद ही उपस्थिति थे, नगर इकाई के 24 पदाधिकारियों में से आधे ही यानी 12 ही मौजूद थे, 28 मंडल अध्यक्षों में से केवल 16 आए थे, इसमें 56 मंडल महामंत्रियों को भी आना था मगर 24 ही आए

इंदौर (प्रशांत कालीधार )। भाजपा के प्रदेश प्रभारी पी. मुरलीधर राव शनिवार को खजराना गणेशजी के दर्शन के बाद भाजपा कार्यालय पहुंचे। पदाधिकारियों ने खुशी-खुशी स्वागत किया। मगर यह खुशी ज्यादा देर टिक नहीं पाई। माइक हाथ में लेते ही मुरलीधर राव ने कार्यकर्ताओ, पदादिकरियों और टिकट के दावेदारों का कड़क अंदाज में हिसाब कर दिया।

बोले- जीते-हारे पार्षदों में से ज्यादातर गायब क्यों हैं? नगर पदादिकरियों की संख्या पूरी क्यों नहीं है? मंडल के अधिकांश पदाधिकारी क्यों नहीं आए? दो विधायक और एक पूर्व विधायक की गैरहाजरी भी उनको नागवार गुजरी। बोले- जो नहीं आया उन लोगों की सूची मुझे दी जाए और उनसे न आने का कारण भी पूछा जाए। राव यहीं नहीं रुके, आगे बोले- जो पार्षद नहीं आए हैं उन्हें या तो चुनाव नहीं लड़ना है या फिर वे मानकर चल रहे होंगे कि उन्हें टिकट मिल ही जाएगा। आप लोग इस बात का ख्याल रखें कि पार्टी सब देख रही है। राव के तेवर से मौजूद भाजपा कार्यकर्ता और पदाधिकारी सन्न रह गए। पार्षदों ने मन ही मन अपनी बिरादरी (हारे-जीते पार्षदों) का हिसाब लगा लिया। निगम के 85 वार्ड में से केवल 25 की उपस्थिति थी। नगर इकाई के 24 पदाधिकारियों में से आधे ही यानी 12 ही मौजूद थे। 28 मंडल अध्यक्षों में से केवल 16 आए थे, इसमें 56 मंडल महामंत्रियों को भी आना था मगर 24 ही आए। तकरीबन आधे से ज्यादा गैरहाजिर कार्यकर्ताओं के कारण ही मुरलीधर राव का मिजाज बिगड़ गया था।

युवाओं को मिलेगा मौका पर जीतने वाले बुजुर्ग को भी नहीं छोड़ेंगे
नगरीय निकाय चुनाव में राव ने युवाओं को ज्यादा से ज्यादा मौका देने की बात कही लेकिन यह भी कहा कि जीतने वाले बुजुर्ग को छोड़ा नहीं जाएगा। मुस्लिम वार्डो में भी पूरे दमखम से लड़ेंगे- बैठक में जब यह कहा गया कि चुनाव के बाद जीते हुए आंकड़ों में प्रतिपक्ष दिखे नहीं, ऐसी तैयारी होना चाहिए। ऐसे में कुछ लोगों ने तर्क दिया कि शहर में 15 वार्ड मुस्लिम बहुल हैं। राव ने कहा- कौन कहता है कि मुस्लिम हमें वोट नहीं करते, हम वहां से भी जीतते हैं और इसी के लिए दमखम के साथ चुनाव लड़ेंगे।

पार्षद पत्नी या पति को टिकट न दिया जाए
बैठक में जब सुझाव मांगे गए तो कार्यकर्ताओं ने कहा किसी पार्षद की पत्नी को टिकट देने के बजाय महिला मोर्चा की कार्यकर्ता को मौका मिलना चाहिए। टिकट देते वक्त दावेदार की लोकप्रियता को भी देखा जाए वहीं सामान्य सीट से सामान्य व्यक्ति को ही टिकट दिए जाने की बात उठी।

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