लिपुलेख दर्रे को लेकर नेपाल ने भारत पर अतिक्रमण के आरोप लगाए हैं अब इस पर जमकर विवाद हो रहा

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

दो दिन पहले भारत ने लिपुलेख तक 80 किलोमीटर लंबा एक सड़क मार्ग तैयार किया था। जिसका रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने वीडियो द्वारा उद्घाटन किया था। लेकिन इस सड़क परियोजना को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। क्योंकि नेपाल का कहना है कि ये उसका इलाका है, जिस पर भारत अतिक्रमण कर रहा है।

ये सड़क चीन सीमा तक आखिरी भारतीय चौकी तक पहुंचती है। लिपुलेख दर्रे के पास तक सड़क बनाने पर नेपाल की तरफ से जताए गए ऐतराज पर आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे ने कहा कि मुझे इसे लेकर कोई विवाद नहीं दिखता। नेपाल के राजदूत ने भी कहा कि काली नदी के ईस्ट साइड का एरिया उनका है इसे लेकर कोई विवाद नहीं है।

आर्मी चीफ ने कहा कि जो रोड बनी है वह नदी के पश्चिम की तरफ बनी है। तो मुझे नहीं पता कि वह असल में किस चीज को लेकर विरोध कर रहे हैं।

भारत-नेपाल के बीच लिपुलेख दर्रे को लेकर खींचतान

रक्षा की दृष्टि से इस सड़क के बनने के बाद भारतीय सेना की पहुँच इस क्षेत्र में और आसान हो जाएगी। नेपाल इस दर्रे को अपनी सीमा का हिस्सा मानता है। इसी कारण कहा जा रहा है कि चीन ने नेपाल को इस सड़क का विरोध करने के लिए भड़का दिया है।

नेपाल की आपत्ति पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने 9 मई को कहा, “हाल ही में पिथौरागढ़ ज़िले में जिस सड़क का उद्घाटन हुआ है, वो पूरी तरह से भारतीय क्षेत्र में पड़ता है। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्री इसी सड़क से जाते हैं।”

नेपाल दावा करता है कि 1816 की सुगौली संधि के अनुसार, लिपुलेख दर्रा उसके इलाके में पड़ता है, इसलिए यहाँ पर भारत के सड़क बनाना गलत है। सुगौली संधि 1816 में ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के बीच हुई थी।

नेपाल कहता है कि सुगौली संधि भारत के साथ उसकी पश्चिमी सीमा का निर्धारण करती है। सुगौली संधि के अनुसार, महाकाली नदी के पूरब का इलाक़ा जिसमें कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख शामिल हैं, नेपाल के क्षेत्र हैं।

इस दर्रे से भारत को क्या फायदा

सड़क बनने से पहले लोग धारचूला से करीब 90 किलोमीटर का सफर तय करके लोग लिपुलेख तक पहुंचते थे।आईटीबीपी और भारतीय सेना के जवानों को भी लिपुलेख तक पहुंचने में दो से 3 दिन का समय लगता था। लेकिन अब सड़क बनने से कुछ ही घंटों में धारचूला से लिपुलेख तक पहुंचा जा सकता है और भारतीय सैनिकों की गाड़ियां चीन की सीमा तक पहुँच सकेंगी।

बीते दिनों ही पूरा हुआ था निर्माण कार्य

बीते दिनों भारत सरकार के समाचार सेवा प्रभाग के अनुसार, सीमा सड़क संगठन ने धारचुला से लिपुलेख तक सड़क निर्माण कार्य पूरा किया था। ये सड़क कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग के नाम से भी प्रसिद्ध है। बीते शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिथौरागढ़ से वाहनों के पहले काफ़िले को रवाना किया था। सरकार का कहना है कि इस सड़क से सीमावर्ती गाँव पहली बार सड़क मार्ग से जुड़ेंगे।

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