कोरोना के नए लक्षण…नर्वस सिस्टम भी बर्बाद कर देता है वायरस

वाशिंगटन

अगर आप खांसी-बुखार को ही कोरोना का लक्षण मान रहे हैं तो आप गलत हैं। अब इसके कुछ नए लक्षण भी सामने आए हैं। अमेरिका के अस्पतालों में भर्ती लाखों मरीजों में से लगभग आधे पर रिसर्च करके शोधकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि मरीजों में खांसी-बुखार से पहले कुछ सामान्य लक्षण भी दिख सकते हैं।

जर्नल ‘एनल्स ऑफ न्यूरोलॉजी’ में प्रकाशित इस रिसर्च में कोविड-19 के मरीजों में खांसी-बुखार और सांस की तकलीफ से भी पहले जिन लक्षणों के उभरने की संभावना जताई गई है, उनमें सिरदर्द, जकड़न और स्ट्रोक के अलावा, चक्कर आना, सतर्कता में कमी, ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत, स्वाद और सुगंध का पता नहीं चल पाना, कमजोरी और मांसपेशियों में दर्द जैसे लक्षण शामिल हैं। रिसर्च के मुताबिक अस्पतालों में भर्ती कोविड-19 के करीब आधे मरीजों में न्यूरोलॉजी से जुड़ी समस्याएं पाई गई हैं। रिसर्च में यह भी कहा गया है कि कोरोना वायरस मरीजों के पूरे नर्वस सिस्टम को बुरी तरह प्रभावित करता है। यानी अगर मरीज इससे उबर भी जाए तो उसके शरीर को काफी नुकसान झेलना पड़ सकता है। रिसर्च में अमेरिका के नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी में स्टडी प्रमुख लेखक डॉक्टर इगोर कोरालनिक ने कहा है, ‘आम जनता और डॉक्टरों के लिए इसके बारे में पता होना महत्वपूर्ण है, क्योंकि SARS-COV-2 इंफेक्शन बुखार, खांसी या सांस की तकलीफ से पहले न्यूरोलॉजिकल लक्षणों के रूप में हो सकता है।’

यह स्टडी इसलिए की गई है, ताकि मरीजों के न्यूरोलॉजिकल सिस्टम से जुड़ी परेशानियों जैसे कि सिरदर्द, जकड़न और स्ट्रोक जैसी अवस्थाओं का बेहतर तरीके से इलाज किया जा सके। रिसर्च में बताया गया है कि नोवल कोरोना वायरस रीढ़ की हड्डियों, मस्तिष्क, तंत्रिकाओं और मांसपेशियों समेत पूरे नर्वस सिस्टम पर असर डाल सकता है। डॉक्टर कोरालनिक के अनुसार यह वायरस अलग-अलग तरीके से न्यूरोलॉजिकल डिसफंक्शन की वजह बन सकते हैं। वैसे तो यह बीमारी फेफड़ों, किडनी और हृदय को ज्यादा प्रभावित करता है, ऑक्सीजन की कमी के चलते दिमाग पर असर डाल सकता है और इसकी वजह से क्लॉटिंग डिसऑर्डर हो सकती है, जो स्ट्रोक तक का कारण बन सकता है।

दिमाग को भी संक्रमित कर सकता है कोविड-19

वैज्ञानिकों ने रिसर्च में पाया है कि यह वायरस ब्रेन को भी सीधे संक्रमित कर सकता है। इसके साथ-साथ यह इम्यून सिस्टम में सूजन ला सकता है, जिसके कारण मस्तिष्क और तंत्रिकाए क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस तरह के रिसर्च से कोविड-19 के मरीजों के न्यूरोलॉजिक लक्षण का पता लगाकर उसका इलाज किया जा सकता है। लेकिन, आम लोगों और डॉक्टरों के लिए यह रिसर्च बड़े काम का साबित हो सकता है और यह वायरस के संक्रमण को लेकर चौकन्ना कर सकता है।

 

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