चीन में हिम्मत नहीं, हमारे सैनिकों की गश्त रोक सके

नई दिल्ली

सीमा पर तनाव रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में दिया बयान, ड्रैगन को ललकारा

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में चीन के साथ सीमा विवाद के मुद्दे पर उसे स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया। राजनाथ ने कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत भारतीय सेना को लद्दाख में पेट्रोलिंग से नहीं रोक सकती। उन्‍होंने साफ किया कि यथास्थिति में बदलाव की चीन की कोशिश भारत को किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है। रक्षा मंत्री ने कहा कि सीमा की सुरक्षा के प्रति हमारे दृढ़ निश्चय के बारे में किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। आने वाले समय में सरकार को देश हित में कितना भी बड़ा और कड़ा कदम उठाना पड़े तो हम पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि भारत मानता है कि पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण संबंधों के लिए आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता रखना आवश्यक हैं। चीन के रवैए से पता चलता है कि वह दोनों देशों के बीच हुए समझौतों का सम्मान नहीं करता। उसने 1993 और 1996 के समझौते तोड़ दिए। रक्षामंत्री ने कहा कि चीन यही मानता है कि सीमा औपचारिक रूप से निर्धारित नहीं है। चीन भारत की लगभग 38 हजार वर्ग किमी. जमीन पर अनधिकृत कब्जा किए हुए हैं।

जरूरत पड़ी तो बड़े और कड़े कदम उठाएंगे : रक्षामंत्री

राजनाथ सिंह ने कहा कि पैन्गोंग झील के दक्षिणी क्षेत्र में 29 और 30 अगस्त को एलएसी पर जो सैन्य कार्रवाई की गई, वो चीन की तरफ से की गई, भारत की तरफ से नहीं। एक बार फिर हमारी सेना ने उनके प्रयास को विफल कर दिया। मौजूदा समय में चीन ने अपनी तरफ बड़ी संख्या में सैनिक टुकड़ियों और गोला बारूद एलएसी पर जुटाया हुआ है। चीन की कार्रवाई के जवाब में भारतीय सेना ने उपयुक्त जवाबी तैनाती की है, ताकि भारत की सीमा पूरी तरह से सुरक्षित रहे।

ऑपरेशन ‘स्नो लेपर्ड’ ने बिगाड़ा पीएलए का खेल

लद्दाख में पांच महीने ​से ​तनाव की स्थिति है।​ शुरुआत में चीन ने कई बार घुसपैठ की कोशिश की लेकिन​ ​भारतीय सेना ​के ‘ऑपरेशन स्नो लेपर्ड’​ ​ने पीएलए की हर चाल को बेनकाब कर​के सीमा पर पासा पलट दिया। इसके लिए अगस्त की शुरुआत से तैयारी की गई​।​ सबसे पहले उन रणनीतिक पहाड़ियों की पहचान की गई जिन्हें हासिल करना था जैसे कि ब्लैक टॉप, गुरुंग हिल, रेजांग ला, मगर हिल, रेचिंग ला, हेलमेट टॉप​​​​।​ ​पहले चीन ​पर पुरानी स्थिति में वापस जा​ने के लिए दबाव बनाया गया। जब कामयाबी नहीं मिली तो पहाड़ियों पर कब्जा किया गया और चीनी सेना को भनक भी न लगी।

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