कैलाशजी और मेरे रिश्ते पर कोई नजर नहीं लगा सकता – शिवराज

कीर्ति राणा | इंदौर

पहली बार देखा दोनों का यह रूप

चौथी बार सीएम बनने के बाद पहली बार इंदौर आए शिवराजसिंह वापस जाने तक हर कार्यक्रम में कैलाश विजयवर्गीय का खातौर पर नामोल्लेख करना नहीं भूले। भाजपा नेता और अधिकारियों ने ऐसा पहली बार ही देखा। यही नहीं, वे ऐसे पहले मुख्यमंत्री भी साबित हुए, जिन्होंने कुमार पुरुषोत्तम के काम की प्रशंसा करते हुए उन्हें कलेक्टर बनाने की घोषणा भी कर दी। इंदौर में कोरोना की प्रभावी रोकथाम को लेकर वे कलेक्टर मनीषसिंह की तारीफ करने से भी नहीं चूके।

मुख्यमंत्री सुबह जब एयरपोर्ट पर उतरे तब से ही उनका ‘कैलाश प्रेम’ नजर आने लगा था। अगवानी करने पहुंचे विजयवर्गीय ने जब कोरोना प्रणाम करते हुए ठहाका लगाया तो बदले में वे भी हंसे और आग्रह करके अपने पास सोफे पर बैठने का अनुरोध किया। दोपहर में कलेक्टोरेट पहुंचे तो यहां कोरोना की समीक्षा बैठक में कलेक्टर मनीषसिंह की तो तारीफ की ही। विजयवर्गीय द्वारा दिए सुझाव व सलाह पर तत्काल अमल किए जाने की बात भी स्वीकारी। फिर अभय प्रशाल पहुंचे तो नगर निगम के आत्मनिर्भर मप्र कार्यक्रम में यह भी कहा कि अपनी शैली से कैलाशजी ने मप्र का दिल तो जीता ही है, पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी मिली तो वहां भी झंडे गाड़े हैं। उनसे पहले सीएम की तारीफ में विजयवर्गीय ने भी कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा मेरी शिवराज जी से रोज बात होती रही है। कोरोना की रोकथाम के उपाय में मैंने जो कहा वो माना। जिस अधिकारी का बोला, उसे भेजा। मजदूर पैदल-भूखे न जाएं, उनके लिए ढाई हजार बसें लगवा दी। बंगाल के दस हजार मजदूरों के लिए तीन ट्रेन के साथ भोजन की व्यवस्था की। इंदौर में 100 से ज्यादा मौतें नहीं होती यदि पंद्रह दिन पहले आप शपथ ले लेते। आप पहली बार आए हैं लेकिन दूर से कोरोना प्रणाम कर के मन नहीं भरा, हालत सुधर जाए फिर आपके स्वागत का बड़ा कार्यक्रम रखेंगे। यहीं पर जब डॉक्टरों का कार्यक्रम चल रहा था तब शिवराज ने आसपास के लोगों से पूछा कैलाशजी कहां हैं, उन्हें बुलाइये। जब उद्योग विभाग व व्यापारियों से चर्चा कर रहे थे तो उनसे बोले कैलाशजी टास्कफोर्स कमेटी में शामिल हैं। उनसे मेरी नियमित चर्चा होती रही। वे आप लोगों की िचंता रखते थे। बैठक समाप्ति के बाद समाज सेवी संस्थाओं के कार्यक्रम में फिर जिक्र किया। प्रवासी मजदूरों की सहायता के लिए उनके प्रयासों की तारीफ की। एकेवीएन के एमडी कुमार पुरुषोत्तम की प्रशंसा में यह कहना भी नहीं चूके कि इनका टाइम आ गया है, इन्हें कलेक्टर बनाना पड़ेगा। और इनकी जगह कोई अन्य प्रभावी अधिकारी तलाशेंगे। ऐसा पहली बार ही हुआ कि किसी मुख्यमंत्री ने किसी अधिकारी को कलेक्टर बनाने की इस तरह घोषणा की हो। हां, कलेक्टर की मंच से तारीफ तो बाकी मुख्यमंत्री भी करते रहे हैं।

प्रेस कांफ्रेंस में ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति तो उनके बयानों से लेकर बॉडी लैंग्वेज तक में शुक्रगुजारी के भाव नजर आ रहे थे, लेकिन इससे कहीं अधिक वे विजयवर्गीय के प्रति आत्मीयता दिखा रहे। सोमवार के जितने भी कार्यक्रमों में उनके भाषण हुए वे कैलाश विजयवर्गीय का जिक्र करने के साथ ही उन्हें संबोधित करते हुए अपनी बात कहते रहे। उनका ऐसा प्रेमभाव पिछले तेरह साल के मुख्यमंत्री काल में देखने को नहीं मिला। शायद यह मालवा क्षेत्र में होने वाली पांच सीटों के उपचुनाव में विजयवर्गीय खेमे के बलबूते मिलने वाली संभावित सफलता की अपेक्षा हो सकती है। यही नहीं इस बार वे अपने सहयोगी गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा के निवास पर चाय-नाश्ता करने भी जा रहे हैं।

नरोत्तम के यहां नाश्ता करने जाने पर आपत्ति क्यों

मीडिया से चर्चा में मुख्यमंत्री से जब पूछा कि उनके इस बदले रूप का कारण क्या चौथी बार में फ्री हैंड नहीं मिलना है? तो उनका कहना था ऐसी कोई बात नहीं है। मैंने जब से होश संभाला और राजनीति में सक्रिय हुआ तब से एबीवीपी से लेकर युवा मोर्चा तक कैलाशजी और मेरी जोड़ी रही है। हमारी टीम में जो लोग रहे अब वे देश और प्रदेश में पार्टी को लीड कर रहे हैं। फिर चाहे वे जेपी नड्डा हों या वीडी शर्मा। हम दोनों के रिश्ते पर कोई नजर नहीं लगा सकता। रही बात नरोत्तमजी की तो वो बहुत दिनों से नाश्ता करने के लिए कह रहे थे। अपने सहयोगी मंत्री के यहां नाश्ता करने जाने पर क्यों आपत्ति होना चाहिए?

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