अब चीनी वैज्ञानिकों का कहना है कि वैक्सीन से नहीं इस दवा से रुकेगा कोरोना

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

दुनियाभर के वैज्ञानिक कोरोनावायरस के वैक्सीन की खोज में दिन-रात एक किए हुए हैं। वहीं, चीन के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने एक ऐसी दवा की खोज की है जिससे कोरोना वायरस का संक्रमण रोका जा सकता है। 

दरअसल चीन की एक लैब का दावा है कि वह एक ऐसी दवा बना रही है, जो कोरोनामहामारी को काबू कर सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस दवा से न सिर्फ संक्रमित जल्दी ठीक हो रहे हैं, बल्कि यह कुछ समय के लिए वायरस से लड़ने के लिए प्रतिरोधी क्षमता (इम्यून) भी बढ़ा रही है।

कोरोना पर संभवतः इस दवा का असर होगा

चीन के प्रतिष्ठित पेकिंग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने कहा कि उनके द्वारा परीक्षण की जा रही दवा से न केवल संक्रमित मरीज जल्दी ठीक होंगे, बल्कि उनके अंदर थोड़े समय के लिए इम्यूनिटी के स्तर में भी इजाफा होगा। यूनिवर्सिटी के बीजिंग एडवांस्ड इनोवेशन सेंटर फॉर जीनोमिक्स के डॉयरेक्टर सनी शी ने बताया कि यह दवा एनिमल टेस्टिंग के दौरान सफल रही है।

यूनिवर्सिटी के बीजिंग एडवांस्ड इनोवेशन सेंटर फॉर जीनोमिक्स के निदेशक सनी झी ने न्यूज एजेंसी एएफपी को बताया कि जानवरों पर इसका परीक्षण सफल रहा है। जब हमने एक संक्रमित चूहे के अंदर न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबॉडी इंजेक्ट कियातो 5 दिन के बाद वायरल लोड 2500 तक कम हो गया।

इसका मतलब है कि इस पर संभावित दवा का असर हुआ है। यह दवा न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबॉडी का इस्तेमाल करती है, जिसे इंसान का प्रतिरोधी तंत्र तैयार करता है, ताकि कोशिकाओं को वायरस से संक्रमित होने से बचायाजा सके। झी की टीम ने 60 ठीक हुए मरीजों से एंटीबॉडी को निकाला।

कोरोना के पांच दवाओं का इंसानों पर टेस्ट किया जा रहा

टीम की रिसर्च रविवार को एक जर्नल में प्रकाशित की गई थी। इसमें कहा गया था कि एटीबॉडी के इस्तेमाल से बीमारी का इलाज संभव है। साथ ही इससे रिकवरी टाइम भी कम हो जाता है। झी ने कहा कि एंटीबॉडी के लिए उनकी टीम दिन-रात काम कर रही थी। अब क्लिनिकल ट्रायल की योजना पर काम चल रहा है।

हालांकि इसे ऑस्ट्रेलिया या अन्य देशों में किया जाएगा क्योंकि चीन में कोरोना संक्रमण के मामले बहुत कम हो गए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि ये एंटीबॉडी कोरोना को रोकने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।

एक स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि चीन में पहले से ही कोरोना के पांच दवाओं का इंसानों पर टेस्ट किया जा रहा है। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि वैक्सीन के विकास में 12 से 15 महीनों का समय लग सकता है।

चीन के इस अधिकारी ने कहा कि प्लाज्मा थेरेपी ने भी चीन में अच्छा काम किया है। इससे 700 से ज्यादा मरीज ठीक हुए हैं। प्लाज्मा थेरेपी ने संक्रमित मरीजों पर अच्छा प्रभाव डाला है।

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