इस गांव की डेढ़ दर्जन बहुओं ने ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के सरकारी दावों से पर्दा हटा दिया है

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। 

उत्तर प्रदेश से आ रही ये खबर तमाम सरकारी दावों को झूठा साबित करती नज़र आ रही है। साथ ही उन औरतों का हाल भी बता रही हैं जो इस कोरोना संकट में कैसे भी करके अपनी दिनचर्या का काम मुश्किल से कर पा रही हैं। बताया जा रहा है ये कोई नया मसला नहीं काफी पुराना है।

हालात इतने खराब हैं कि इस मामले में गांव की लगभग डेढ़ दर्जन बहुएं ससुराल छोड़कर मायके चली गईं हैं।और वजह कुछ ऐसी है कि जिसे सुनकर आपको हैरानी बिल्कुल नहीं होगी।

जो बात सामने आई है वह सरकारी दावे को झूठा साबित कर रही है

फ़ोटो साभार- अखिलेश तिवारी

शौचालय बनाने की कवायद काफी पहले बहीखाताओं में शुरू हो गयी थी लेकिन जमीन पर इसे जोर वर्ष 2018 में मिली जब कुशीनगर जनपद ओडीएफ मुक्त कर दिया गया।

उत्तर प्रदेश राज्य के कुशीनगर जनपद की। वैसे तो इसे (खुले में शौच से मुक्त) घोषित किया गया है लेकिन जो बात सामने आई है वह सरकारी दावे को झूठा साबित कर रही है।

शौचालय नहीं होने से जंगल जगदीशपुर टोला भरपटिया में लगभग डेढ़ दर्जन बहुएं ससुराल छोड़कर मायके चली गयीं हैं। दुल्हनों का कहना है कि शौचालय के बगैर उन्हें काफी दिक्कत हो रही थी।

डेढ़ दर्जन बहुओं ने पर्दा हटा दिया है

फ़ोटो साभार- अखिलेश तिवारी

स्वच्छ भारत मिशन के तहत कुशीनगर जनपद में तकरीबन 4 लाख शौचालय बनने थे। कुशीनगर जनपद को 30 नवंबर 2018 को ओडीएफ घोषित कर दिया गया। ओडीएफ मतलब सभी शौचालयों का निर्माण शत प्रतिशत करा दिया गया है।

परंतु इस सरकारी दावे पर से पडरौना विकास खंड के जंगल जगदीशपुर टोला भरपटिया की लगभग डेढ़ दर्जन बहुओं ने पर्दा हटा दिया है। भरपटिया टोले की यह बहुएं ससुराल छोड़कर मायके इसलिए चली गईं है क्योंकि घर में शौचालय नहीं है और उन्हें नित्य जरूरत के लिए तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

इस मामले में सनंती देवी, अभिषेक के हवाले से हमसे बात करते हुए बताती हैं, “शौचालय ना बनने के कारण मेरी बहु को आज इस महामारी में गांव घर छोड़ कर जाना पड़ा है। ग्राम प्रधान से हमलोग कई बार शिकायत किये हैं लेकिन उन्होंने ये कहकर टाल दिया कि सूची में नाम ही नहीं है अब आज हालात इतने खराब हो गए हैं कि हमारी बहुओं को घर छोड़ना पड़ रहा है।”

उन्होंने आगे बताया कि बरसात में पानी जमा हो जाता है जिसके कारण बहुएं बाहर नहीं जा पाती साथ ही लड़के भी वहीं जाते हैं तो अक्सर खतरा भी बना रहता है।

बरसात में ‘घूँघट’ की इस बगावत ने सारी पोल खोल दी है

फ़ोटो साभार- अखिलेश तिवारी

अखिलेश तिवारी जो इस घटना के वक़्त मौके पर मौजूद थे और खुद एक रिपोर्टर हैं वो इस मसले पर बताते हैं कि मोदी सरकार स्वच्छता को लेकर अरबो रुपये खर्च कर रही है और यह दावा कर रही है कि देश के हर घरों में शौचालय की सुविधा पहुँच चुकी है लेकिन बरसात में ‘घूँघट’ की यह बगावत स्वच्छ भारत मिशन के सरकारी दावों की सारी पोल खोलकर रख दी है।

वहीं प्रभात जो कुशीनगर में रहते हैं और पत्रकार हैं वो गांव के हालात के बारे में बताते हैं कि वो गरीब, मुसहर लोगों की बस्ती है जहां पक्की मकानें आप उंगलियों पर गिन सकते हैं यानी नामभर की पक्की मकानें हैं अब खुद सोचिये एक तो ज्यादातर कच्ची मकानें ऊपर से बरसात। वहां अधिकतर घरों के पास से ही एक नाला भी बहता है जिससे घर से बाहर निकलना ही दूभर है शौचालय जाने की तो बात ही छोड़ दीजिए।

बहुओं ने इस मामले पर क्या कहा

शौचालय निर्माण का सच सामने लाने वाली इन बहुओं का कहना है कि गांव के एक तरफ नाला है तो दूसरी तरफ नहर। चारों तरफ पानी लगता है। जिससे बहुत दिक्कतें आती हैं। जब तक ससुराल में शौचालय नहीं बन जाता है तब तक मायके में ही रहेंगी।

सोनी जो भरपटिया टोला की बहू हैं उनका कहना है, “जब हम ब्याह कर आये थे तब यहां देखे कि शौचालय नहीं है जबकि हमारे मायके में था। अब हम अक्सर यही सोचते थे कि कैसे हम यहां मैनेज कर पाएंगे लेकिन जैसे तैसे चार साल काट लिए। लेकिन अब जब ये महामारी का समय आ गया है जहां सफाई का ध्यान रखना है, दूरी भी बना कर रखना है ऐसे में बरसात का मौसम। इतनी मुश्किल के बाद हमलोगों ने मिलकर ये कदम उठाया।”

अभी तक हमसे कोई छेड़खानी नहीं हुआ है

फ़ोटो साभार- अखिलेश तिवारी

वहीं सुमन जो अभी अपने मायके में हैं बताती हैं कि हमलोगों को काफी दिक्कत होता है। एक तो हम बहुओं से ज्यादा लड़की हैं इससे हमेशा डर बना रहता है कि कहीं कोई देख ना ले। कभी कभी हमको तो रात में नाला तरफ जाना पड़ता था एक तो नाले की बदबू दूसरा खुद को बचाने का डर।

सुमन आगे बात करते हुए बताती हैं, “अभी तक हमसे कोई छेड़खानी नहीं हुआ है, ना यहां की बिटिया लोग भी इसकी शिकायत की हैं लेकिन आगे का क्या भरोसा कब किसकी नीयत बिगड़ जाए।”

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक गांव में 15 टोले हैं और आबादी लगभग 6500 है। यहां 1700 परिवारों में 465 शौचालय आवंटित किए गए हैं। 2017 में ही गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया गया। जबकि काफी संख्या में लोगों के पास शौचालय नहीं हैं और लोग शौच के लिए खुले स्थानों का ही उपयोग करते हैं।

हम तो जैसे तैसे अपनी जिंदगी काट लिए

फ़ोटो साभार- अखिलेश तिवारी

इस गाँव की रहने वाली अनाई देवी हाथ से विकलांग हैं। इनके पास रहने के लिए कच्चा घर है। अनाई देवी का कहना है आवास देने का वादा किया गया था ना आजतक आवास मिला ना शौचालय।

“हम तो जैसे तैसे अपनी जिंदगी काट लिए लेकिन मेरी बहु सोनी जब बरसात शुरू हुई तो घर छोड़कर मायके चली गई। यहां खेत में पूरा पानी भर जाता है नाला भी बहता है अब इस स्थिति में कैसे कोई खुले में जा सकता है।” अनाई देवी दुःखी होकर बताती हैं।

हम तो कैसे भी कर के दो वक्त की रोटी कमा पाते हैं

फ़ोटो साभार- अखिलेश तिवारी

शिवराज जो भरपटिया टोला के बेटे हैं बताते हैं, “हमारी पत्नी घर छोड़ कर चली गईं हैं। बोलती है कि शौचालय नहीं बनेगा तो नहीं आएंगे, कौन आएगा वहां लोगों के डंडे खाने। हम तो कैसे भी कर के दो वक्त की रोटी कमा पाते हैं अब इसमें हम कैसे शौचालय बनवा दें।”

बाकी पतियों की भी यही समस्या है। उस गांव में अधिकतर लोग किसानी का काम करते हैं या मजदूरी का जिससे कैसे भी परिवार का पेट भर पाता है अब इसमें शौचालय बनवाने का ख्याल भी उनके लिए महंगा है।

गांव में एक सार्वजनिक शौचालय का निर्माण शुरू हो चुका है

फ़ोटो साभार- अखिलेश तिवारी

जानकारी होने पर डीपीआरओ राघवेंद्र द्विवेदी गांव पहुंचे और परिवार के लोगों को समझाया। जब इस बारे में मीडिया कर्मियों ने बात कि तो उन्होंने बताया कि जगदीशपुर गांव स्थित अपनी-अपनी ससुराल में शौचालय न होने के कारण महिलाओं के घर छोड़ने की बात संज्ञान में आयी है।

इसके बाद जिला पंचायती राज अधिकारी ने गांव का दौरा किया और उन परिवारों से बात की जिनके यहां शौचालय नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का नाम सरकारी सूची में था, उनके यहां शौचालय पहले ही बनाये जा चुके हैं। जिनके यहां नहीं बने हैं, उनके लिए शौचालयों का बंदोबस्त किया जा रहा है। गांव में एक सार्वजनिक शौचालय का निर्माण शुरू हो चुका है।

परिवारों के मुखिया का नाम एमआईएस सूची में नहीं है

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एडीओ पंचायत मैनेजर सिंह का कहना है कि इन परिवारों के मुखिया का नाम एमआईएस सूची में नहीं है। इसलिए शौचालय नहीं बन पाया है। एक महिला अपने पति के साथ मायके गई है अन्य महिलाएं गांव में ही हैं। इस टोले पर सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया जाएगा।

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