बच्चों को ज़्यादा भारी बस्ते के बोझ से बचाने के लिए पहली से सातवीं तक केवल एक टेक्स्ट बुक

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर। हम अक्सर अपने आस-पास के बच्चों को खुद के वजन से ज़्यादा भारी बैग ले कर स्कूल जाते देखते हैं। पूछने पर पता चलता है इतना बोझ इनके सिलेबस का हिस्सा है। लेकिन अब इस समस्या पर पेरेंट्स से लेकर सरकार का ध्यान जाने लगा है।

स्कूली बच्चों को बस्ते के बोझ से छुटकारा दिलाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक फैसला लिया है। आगामी शैक्षणिक वर्ष से, राज्य भर के 59 ब्लॉकों में सरकार द्वारा संचालित मराठी माध्यम स्कूलों की कक्षा पहली से सातवीं तक के छात्रों को अब मात्र एक किताब स्कूल ले जानी होगी। मुंबई मिरर की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब छात्रों को सभी विषयों के लिए केवल एक पाठ्यपुस्तक ले जानी होगी। पहल स्कूल बैग को हल्का करने के प्रयासों का हिस्सा है।

राज्य पाठ्यक्रम और प्रकाशन ब्यूरो बलभारती का मानना है कि पाठ्यपुस्तकों को विषयों और प्रत्येक वर्ग की जरूरतों के अनुसार तीन या चार भागों में विभाजित किया जाएगा, और फिर प्रत्येक भाग को एक ही पुस्तक में विलय कर दिया जाएगा। इन एकीकृत पाठ्यपुस्तकों से छात्रों को “शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम” बनाया जाएगा।

बालभारती के निदेशक विवेक गोसावी ने कहा कि भारी स्कूल बैग के बारे में बच्चों के माता-पिता और शिक्षाविदों की लगातार शिकायतों के बाद इस योजना के बारे में सोचा गया। भारी बैग बहुत कम उम्र में छात्रों में पीठ दर्द, मांसपेशियों में मरोड़, मोच, गर्दन में दर्द और मानसिक तनाव का कारण साबित हुए हैं। इसकी सफलता के आधार पर राज्य के अन्य स्कूलों में इस पहल को बढ़ाया जाएगा।

स्कूल प्रिंसिपल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रशांत रेडिज ने सिफारिश की कि इस योजना में नोटबुक को भी कवर किया जाए। उन्होंने कहा “हर विषय की एक अलग नोटबुक होती है। बलभारती को उन्हें एक किताब में बदलने के तरीकों पर भी चर्चा करनी चाहिए। यह छात्रों पर बोझ को और कम करेगा।”

पिछले साल, केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने स्कूल सिलेबस को ‘तर्कसंगत’ बनाया था। इसने विभिन्न वर्गों के लिए स्कूल बैग के वजन पर एक रोक लगाई थी – कक्षा पहली से दूसरी कक्षा के लिए 1.5 किलो, कक्षा तीसरी से पांचवी के लिए 3 किलो, कक्षा छठी से सातवीं के लिए 4 किलो और कक्षा आठवीं के लिए 4.5 किलोग्राम।

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