ऑस्ट्रेलिया में 10 हजार ऊंटों को गोली मारने का आदेश

केनबर्रा

सूखाग्रस्त इलाकों में पीने के पानी को बचाने के लिए ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी नेताओं ने दिया मारने का आदेश, हेलीकॉप्टर से होगा ऊंटों का शिकार

आमतौर पर देखा होगा कि दुनियाभर में जीव-जंतुओं को बचाने की कोशिश होती है, लोग जीव जंतुओं को बचाने के लिए बड़ी से बड़ी मुश्किलों से जूझ जाते हैं। इसका एक उदाहरण आस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी भीषण आग का है। इस जंगल में लगी आग में लगभग लाखों जानवर जलकर राख हो गए हैं। जो जानवर बचे हुए हैं इसके लिए वहां के लोग किसी तरह से उन्हें बचाने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन आस्ट्रेलिया में ही कुछ नेता ऐसे हैं जो जानवरों को बचाने के बजाए मारने का आदेश जारी कर रहे हैं।

दरअसल ऑस्ट्रेलिया में आदिवासी नेताओं के एक फैसले ने सबको हैरान कर दिया है। नेताओं ने सूखाग्रस्त इलाकों में पीने के पानी को बचाने के लिए दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में करीब 10 हजार जंगली ऊंटों को गोली से मारने का आदेश दिया है। नेताओं के इस अजीबो गरीब बयान से सब हैरान है।

जानकारी के मुताबिक यह काम बुधवार से शुरू किया जाएगा। ऊंटों की हत्या के लिए पेशेवर शूटर बुलाए गए हैं जो हेलीकॉप्टर से ऊंटों का शिकार करेंगे।

एयरकंडीश्नरों को पहुंचा रहे नुकसान

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले कुछ आदिवासी समुदायों की शिकायत है कि जंगली ऊंट पानी की तलाश में उनके इलाके में आते हैं और उनकी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाते हैं। पानी की तलाश में ऊंट लोगों के घरों में लगे एयरकंडीश्नरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यह क्षेत्र भयंकर सूखे के दौर से गुजर रहा है। इसी शिकायत के बाद ऊंटों को मारने का फैसला लिया गया है।

ऊंटों की बढ़ती हुई आबादी भी चिंता का विषय

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ऊंटो को मारने में करीब पांच दिनों का समय लग सकता है। चिंता का विषय यह भी है कि पशु ग्लोबल वार्मिंग में भी अपना योगदान दे रहे हैं क्योंकि वे एक वर्ष में एक टन कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर मीथेन का उत्सर्जन करते हैं। ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय जंगली ऊंट प्रबंधन योजना का दावा है कि अगर ऊंटों को लेकर कोई रोकथाम योजना नहीं लाई गई तो यहां जंगली ऊंटों की आबादी हर नौ साल में दोगुनी हो जाएगी। एक लाख जंगली ऊंट प्रति वर्ष जितनी कार्बन डाइऑक्साइड के बराबर मीथेन का उत्सर्जन करते हैं, वह सड़क पर चलने वाली अतिरिक्त चार लाख कारों के बराबर है।

जानवरों के उत्सर्जन को देश के उत्सर्जन अनुमान में नहीं

ऊर्जा एवं पर्यावरण विभाग का कहना है कि जंगली जानवरों के उत्सर्जन को देश के उत्सर्जन अनुमान में नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि वे घरेलू प्रबंधन के तहत नहीं हैं। ऑस्ट्रेलिया वैसे भी जंगलों में लगी भयंकर आग से जूझ रहा है। इस अग्निकांड में अब तक लाखों जीव-जंतुओं की जलकर मौत हो चुकी है। कई दर्दनाक तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

ऐसे में यहां ऊंटों की बढ़ती आबादी भी चिंता का विषय बना हुआ है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ऊंटो का मारना समस्या का हल नहीं है। स्थानीय सरकार चाहे तो धीरे-धीरे कर ऊंटों का विस्थापन कर सकती है।

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