पटना की स्कोरिन्ग मशीन को मिला एशिया की युवा रगबी खिलाड़ी का खिताब

विभव देव शुक्ला

बिहार की राजधानी पटना के पास एक छोटी सी जगह है नवादा, यहाँ की रहने वाली है 19 साल की स्वीटी कुमारी। स्वीटी रगबी खेलती हैं और हाल ही में उसे एशिया की सबसे तेज़ रगबी खिलाड़ी का खिताब भी मिल चुका है। इतना ही नहीं बीते साल के अंत में दुनिया भर के 10 रगबी खिलाड़ियों को चुना गया और इनके लिए सार्वजनिक रूप से वोटिंग कराई गई। नतीजे सभी के लिए चौंकाने वाले थे, लोगों ने स्वीटी को सबसे ज़्यादा पसंद किया।

100 मीटर डैश महज़ 11.58 सेकेंड में
सवाल उठता है कि इतना कुछ कैसे हुआ और स्वीटी के हिस्से में ऐसे कौन से कारनामे हैं जिनके चलते उसे इतनी तवज्जो मिली? कुछ ही दिनों पहले स्वीटी ने रगबी में 100 मीटर डैश की दूरी 11.58 सेकेंड में पूरी की। स्वीटी को उसके साथी खिलाड़ी भारत की स्कोरिन्ग मशीन के नाम से पुकारते हैं।
इन सारी बातों के अलावा दुनिया की मशहूर रगबी पत्रिका ‘स्क्रमक्वींस’ ने स्वीटी को साल 2019 की अंतर्राष्ट्रीय युवा खिलाड़ी के ख़िताब से नवाज़ा है। यह सब होने के पहले स्वीटी के कोच ने उसे स्पाइक्स जूते खरीद कर दिए थे। जिसे पहन कर खेल के मैदान में उतरना स्वीटी के लिए पूरी तरह अलग अनुभव था।

फिलीपींस के सामने उल्लेखनीय प्रदर्शन
हाल ही में फिलीपींस के खिलाफ खेलते हुए स्वीटी का प्रदर्शन काफी चर्चा में रहा। इस खेल के बाद स्वीटी ने एक समाचार समूह से बात करते हुए कहा था ‘फिलीपींस के साथ खेलते हुए कुल 6 टैकलर थे और सिंगापुर के साथ खेलते हुए 4 लेकिन उनमें से कोई भी मुझे पकड़ नहीं पाया। उन सभी ने तमाम कोशिशें की, कोई आगे से आता था और कोई बगल से। कई पूरी ताकत से खींचने की कोशिश भी करते थे लेकिन कोई मुझे पकड़ नहीं पाया। मैंने खेलने के दौरान कोई कसर नहीं छोड़ी।
स्क्रमक्वींस ने स्वीटी के बारे में लिखा ‘उसने शुरुआत से ही सभी का ध्यान खींचा। सभी उसे जानते और पहचानते थे लेकिन इस साल उसके खेल का असर पूरे एशिया पर पड़ा। एशिया रगबी ने स्वीटी को एशिया का सबसे तेज़ खिलाड़ी माना था, उसकी रफ्तार, संतुलन और खेल के दौरान लगाई गई ताकत के चलते वह भारत के सेवेन्स टूर्नामेंट में शीर्ष पर बनी रही। इतना ही नहीं सिंगापुर के साथ हुए टेस्ट मैच में भी उसका प्रदर्शन उल्लेखनीय था, जिसके बाद उसने सभी का ध्यान खींचा।

पहले नहीं पता थे नियम
स्वीटी के कुल 7 भाई बहन हैं और वह 5वीं सदस्य है। स्वीटी का बड़ा भाई भी खेलों में रुचि रखता है जिसे देख उसके मन में भी रगबी खेलने की इच्छा जगी। स्वीटी के भाई ने कुछ ही समय बाद खेलना छोड़ दिया लेकिन उसने अपना खेल बरकारार रखा। स्वीटी एक समाचार समूह से बात करते हुए कहती है कि अब उसके घर वाले उसके बाकी भाई बहनों को डांटते हैं। ‘स्वीटी की ज़िन्दगी बन चुकी है तुम लोग उससे कुछ सीख लो।’
उसके कोच ने उसे रगबी के नियमों के बारे में बताया क्योंकि शुरुआत में स्वीटी इस खेल के साथ बहुत परिचित नहीं थी। बहुत कम समय में स्वीटी ने इस खेल के तमाम अहम नियम समझ लिए, एक जूनियर कैंप में अमेरिकी कोच माइक फ्राईडे ने स्वीटी को कई अहम बातें सिखाई। जैसे पास बिहाइंड, रन इन फ्रंट और बाकी डिफ़ेंडर्स से कैसे बचना है। स्वीटी का मानना है कि रफ्तार ईश्वर का उपहार है उसके बाद वह अपने हिस्से की पूरी मेहनत करती है।

खिलाड़ियों को खेलते देख लगा अपने जैसा
स्वीटी के पिता रोज़ाना काम करके कमाते हैं और माँ आंगनवाड़ी में काम करती है। स्वीटी का कहना है कि इस दौरान उसके पिता ने उसका हर मौके पर समर्थन किया और उसने भी मौका आने पर खुद को साबित किया। फिलहाल स्वीटी को उसके आस-पास रहने वाले लोग बहुत अच्छे से पहचानने लगे हैं। एक अनुभव साझा करते हुए उसने बताया कि कुछ दिन पहले उसकी परीक्षाएँ थीं। जैसे ही वह अंदर दाखिल हुई वहाँ मौजूद सभी लोग उसके लिए तालियाँ बजाने लगे।
स्वीटी ने पिछले कई सालों से फिल्म और टेलीवीजन देखना बंद कर दिया है। फिलहाल वह दुनिया के मशहूर खिलाड़ियों के खेल का वीडियो ही देखती है, उसका कहना है कि उन्हें देखने के बाद उसके खेल में बहुत बदलाव आता है। उन्हे देख कर कभी कभी तो लगता है ‘वह हमारे जैसे हैं या हम उनके जैसे खेल रहे हैं’? लेकिन मेरे लिए असली चुनौती एशिया के बाहर ही होगी। उसे अपने माँ के हाथों का बनाया हुआ खाना बहुत पसंद है, वह सिर्फ अपनी माँ के हाथों का बनाया हुआ चिकन – मटन खाती है।

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