गर्भवती हथिनी को लोगों ने खिलाया पटाखों से भरा अनानास, बच्चा समेत हथिनी की हुई दर्दनाक मौत

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

केरल राज्य को सबसे ज्यादा प्रकृति से जुड़ा बताया जाता है। खुद केरल भी अपने आप को प्राकृतिक बोल कर ही बाकी राज्यों और देशों के सामने रिप्रेजेंट करता है। लेकिन केरल से आ रही ये घटना प्रकृति के खिलाफ ही नहीं मानवता को भी शर्मशार कर रही है। ये घटना वहां के लोगों की घृणित मानसिकता को दर्शाता है।

कुछ मौत की खबर लिखना आसान नहीं होता क्योंकि खबर का एक-एक लाइन, शब्द, पैरा उस मौत के दर्द को बयां करते हैं।

ये घटना केरल के मलप्‍पुरम जिले की है। दरअसल यहां कुछ लोगों ने एक गर्भवती भूखी हथिनी को अनानास के बीच पटाखे डालकर खिला दिए। ये पटाखे हथिनी के मुंह में फट गए। इससे हथिनी के साथ-साथ उसके पेट में पल रहा बच्‍चा भी मर गया। 

इंसानों ने एक बार और जानवरों का भरोसा खत्म कर दिया

रेस्क्यू टीम का हिस्सा रहे वन अधिकारी मोहन कृष्णन ने अपना दर्द बयां करते हुए फेसबुक पोस्‍ट में लिखा, “उसने(हथिनी) सभी पर भरोसा किया। जब वह अनानास खा गई और कुछ देर बाद वह उसके मुँह में यह फट गया तो वह परेशान हो गई। हथिनी अपने लिए नहीं, बल्कि उसके पेट में पल रहे बच्चे के लिए परेशान हुई होगी, जिसे वह अगले 18 से 20 महीने में जन्म देने वाली थी।”

मादा हाथी खाने की तलाश में जंगल से पास के गांव में पहुंच गई थी। यहां वह इधर-उधर घूम रही थी। इसके बाद उसे कुछ लोगों ने पटाखे भरे अनानास खिला दिए।

मोहन कृष्णन आगे लिखा, ‘पटाखे इतने असरदार थे, कि उसका मुंह और जीभ बुरी तरह से जख्मी हो गए। वह खाने की तलाश में पूरे गांव में भटकती रही। दर्द के चलते वह कुछ खा भी नहीं सकी। मादा हाथी ने घायल होने के बावजूद किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया, किसी पर हमला भी नहीं किया। वह बहुत सीधी और शांत थी।’ 

मादा हाथी खाने की खोज में वेल्लियार नदी तक पहुंच गई क्योंकि उसके पेट में बच्चा था। वो पानी में खड़ी हो गई। पानी में मुंह डालने से उसे थोड़ा आराम भी मिला।

जब उसके अधजन्मे बच्चे को मैंने अपने हाथों से पकड़ा था

घटना की सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम हथिनी को लेकर आई। हालांकि, कुछ देर बाद ही हथिनी ने दम तोड़ दिया। अधिकारियों ने बताया कि पटाखे उसके मुंह में फट गए जिससे मुंह और जीभ बुरी तरह से जख्मी हो गए। दर्द के कारण वह कुछ खा नहीं पा रही थी। उसके पेट में पल रहे बच्चे को भी कुछ नहीं मिल पा रहा था। उसने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।

त्रिशूर के सहायक वन पशु चिकित्सा अधिकारी, डॉ डेविड अब्राहम ने हाथी का पोस्टमॉर्टम किया। उन्होंने कहा कि हथिनी के घाव देखते ही यह साफ हो गया था कि ये जिंदा नहीं बचेगी।

उन्होंने कहा कि दो दशकों के अपने करियर में मैंने बहुत से हाथियों के पोस्टमॉर्टम किए लेकिन ये घटना कुछ अलग थी ऐसा पहली बार हुआ था जब मैंने हथिनी के अधजन्मे बच्चे को अपने हाथों से पकड़ा था। ये बहुत ज्यादा इमोशनल मूमेंट था मेरे लिए।

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