चीन की आक्रामकता के खिलाफ ‘बॉयकॉट चाइना’ की तख्तियां लेकर अमेरिका में भारी प्रदर्शन पर निकले लोग

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

इस वक़्त भारत के गांवों के चौराहों से लेकर अमेरिका के गलियों तक इन दिनों एक ही आवाज, एक ही नारा गूंज रहा है- बॉयकॉट चाइना। भारत और चाइना की इस जंग में अब अमेरिका भी खुल कर भारत के साथ आ गया है।

शुक्रवार को जहां एक ओर भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख की यात्रा कर भारतीय सेना का मनोबल बढ़ाया। वहीं दूसरी ओर अमेरिका के न्यूयॉर्क में चीन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया।

चीन की आक्रामकता के खिलाफ अमेरिका में प्रदर्शन

चीन की आक्रामकता के खिलाफ अमेरिका के टाइम्स स्क्वायर में भारतीय अमेरिकी, तिबत्ती और ताइवानी अमेरिकी नागरिकों ने चीन के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में ‘बॉयकॉट चाइना’ और ‘चाइनीज बदमाशी रोको’ जैसे नारे लिखे हुए तख्तियां थीं।

प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान लोगों से चीन की वस्तुओं का बहिष्कार करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चीन के साथ सभी व्यापारिक रिश्ते खत्म करने की भी मांग की। साथ ही तिब्बत के लिए पूर्ण आजादी और ताइवान को पूरा समर्थन देने की भी अपील की।

चीन दुनिया पर दादागिरी जमाना चाहता है

अमेरिकन इंडिया पब्लिक अफेयर्स कमिटी के प्रेजिडेंट जगदीश सेवहानी ने एएनआई से बात करते हुए कहा, ”जब दुनिया पिछले छह महीने से कोरोना वायरस महामारी से लड़ रही है, पड़ोसियों और भारत के खिलाफ चीन की नग्न आक्रामकता स्वीकार्य नहीं है। चीन दुनिया पर दादागिरी जमाना चाहता है। चीन अमेरिका और भारत को बर्बाद करना चाहता है। लेकिन इस बार उन्हें आक्रामकता की बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।”

उन्होंने आगे कहा कि अब देखिए चीन अपने ही देश में क्या कर रहा है। वे हांगकांग को दबा रहे हैं। उन्होंने तिब्बत में नरसंहार किया और देखिए उन्होंने मुसलमानों के साथ क्या किया। मानवाधिकारों का सबसे खराब हनन चीन में ही हुआ।

निर्वासित तिब्बती संसद के सदस्य दोर्जी सेतेन ने कहा कि तिब्बत के लोग भारतीय भूमि में चीनी घुसपैठ का जोरदार विरोध करते हैं।

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