एक जानी-मानी टीवी एंकर प्रिया जुनेजा ने अपने ही घर में फांसी लगा ली

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

बॉलीवुड स्टार्स की लगातार मौतों के बाद अब मौत का साया मीडिया जगत पर भी मंडराने लगा है। आज एक बड़े न्यूज चैनल की एंकर ने मौत को गले लगा लिया।

टीवी चैनल में काम करने वाली ऐंकर प्रिया जुनेजा ने आत्‍महत्‍या कर ली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी यह साफ नहीं है कि उन्‍होंने यह कदम क्‍यों उठाया।

प्रिया की मौत से पूरा मीडिया जगत सदमे में है

एक जानी-मानी टीवी एंकर प्रिया जुनेजा ने पूर्वी दिल्ली के वेलकम इलाके में आज सुबह अपने घर में फांसी लगा ली, हालांकि प्रिया के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।

प्रियंका का शव पोस्टमार्टम के बाद उनके परिजनों को सौंप दिया गया है, प्रिया की मौत से पूरा मीडिया जगत सदमे में है, अभी यह साफ नहीं है कि उन्‍होंने यह कदम क्‍यों उठाया, फिलहाल उनके आत्महत्या करने के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

कथित तौर पर बताया जा रहा है कि नौकरी चले जाने से वे काफी दुखी थीं। प्रिया के जानने वालों के भरोसा ही नहीं हो रहा है कि उनकी खुशमिजाज प्रिया अब इस दुनिया में नहीं है। प्रिया जुनेजा के ट्विटर अकाउंट पर उनका स्टेटस बी पॉजिटिव है।

प्रिया खुशमिजाज और सकारात्मक सोच की मालकिन थीं

जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रिया काफी खुशमिजाज और सकारात्मक सोच की मालकिन थीं। ऐसे में उन्होंने ये कदम क्यों उठाया ये, इस सवाल का जवाब हर कोई खोज रहा है, फिलहाल प्रिया की मौत से उनके घरवाले गहरे सदमे में हैं और कोई भी अभी कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है।

प्रिया ने डीयू से मास कम्युनिकेशन की डिग्री ली थी और 24×7 न्यूज़, सीएनएन न्यूज, खबर फास्ट जैसे चैनलों में काम किया था। वे हाल-फिलहाल तक खबर फास्ट चैनल में बतौर एंकर काम कर रही थीं। प्रिया न्यूज एंकर्स के साथ एक अच्छी मॉडल भी थीं।

लॉकडाउन लोगों को मानसिक रूप से कमजोर किया है

उनके कुछ साथियों ने इसपर दुःख जताते हुए लिखा है ‘ऐसा कोई कदम उठाने से पहले आसपास के लोगों से बात करनी चाहिए थी।’ लेकिन सवाल ये उठता है कि जब कोई व्यक्ति आत्महत्या जैसी मनोदशा या डिप्रेशन से गुजरता है तो क्या वाकई उसको किसी से बात करने का मन होता होगा?

इस कोरोना काल में लोग आत्महत्या से लेकर तमाम मानसिक मनोदशा से गुज़र रहे हैं। इस चार महीने के लॉकडाउन ने वाकई बहुत लोगों को मानसिक रूप से कमजोर कर दिया है। ये वक्त उन लोगों के लिए और नाज़ुक है जो छोटे/बड़े शहरों में अकेले रह रहे हैं।

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