रिटायर्ड जेल डीजी राजेंद्र चतुर्वेदी को भ्रष्टाचार के मामले में 5 साल की कैद

फूलन देवी का समर्पण करा कर आए थे सुर्खियों में, फूलन बांधती थी राखी

धर्मेन्द्र पैगवार प्रजातंत्र ब्यूरो, भोपाल।

राजधानी की एक अदालत ने रिटायर्ड आईपीएस अफसर और तत्कालीन जेल डीजी राजेंद्र चतुर्वेदी को भ्रष्टाचार के एक मामले में 5 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। चतुर्वेदी 1982 में देशभर में तब सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने दस्यु सुंदरी फूलन देवी का तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय अर्जुन सिंह के सामने आत्मसमर्पण कर आया था। बाद में फूलन देवी उन्हें अपना भाई मानने लगी थी और उन्हें राखी बांधती थी।

अभियोजन के अनुसार वर्ष 2003 में चतुर्वेदी जेल डीजी थे। तब सीआईडी और ईओडब्ल्यू को शिकायत मिली थी कि उन्होंने जेल प्रहरियों की नियुक्ति में 18 लाख रुपए की रिश्वत ली है। मामले की जांच हुई तो सामने आया कि रीवा आईजी रहते उनके संपर्क में जो पुलिसकर्मी आए थे उनकी मदद से उन्होंने जेल प्रहरी की भर्ती में कई लोगों से कुल ₹12 लाख 45 हजार रूपए लेकर उनके साथ छल किया था। तब वर्ष 2006 मेंउनके खिलाफ धोखाधड़ी पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज हुआ था।

14 साल तक अदालत में चले इस मामले में गुरुवार को फैसला आया। राजधानी के प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश संगीत पांडे ने उनके खिलाफ लगे आरोपों को दोष सिद्ध माना। उन्होंने अभियुक्त राजीव चतुर्वेदी को 5 साल के कारावास और ₹8 लाख 75 हजार के अर्थदंड की सजा दी है।

कौन है राजेंद्र चतुर्वेदी
रिटायर्ड आईपीएस अफसर राजीव चतुर्वेदी 1980 के दशक में देश की मीडिया में छाए रहे हैं। बेहमई कांड के बाद आतंकी दुनिया में फूलन देवी एक बड़ा नाम था। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने फूलन और मलखान सिंह के आत्मसमर्पण का जिम्मा तत्कालीन भिंड एसपी राजेंद्र चतुर्वेदी को सौंपा था। चतुर्वेदी ने अपने संपर्कों के जरिए बीहड़ में जाकर फूलों से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के पहले बे फूलन की मां और बहन मुन्नी से भी मिल कर आए थे। उनकी रिकॉर्ड की हुई आवाज फूलन को सुनाई थी। फूलन से मुलाकात के बाद मैं दिल्ली जाकर मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह से मिले थे और उनके साथ तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से भी। फूलन के समर्पण के बाद वे रातों रात देश के आईपीएस अफसरों में हीरो बन गए थे। बाद में भ्रष्टाचार के मामले में फसने के बाद लोगों ने उनसे किनारा करना शुरू कर दिया था। फूलन देवी उन्हें राखी बांधती थी।

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