सतीश पूनिया का बयान ‘यदि हालात अनुमति देते हैं तो सचिन पायलट मुख्यमंत्री बन सकते हैं’

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।

राजस्थान के रण में लगातार सियासी उठापटक का खेल जारी है। शुक्रवार को हाई कोर्ट का फैसला आना है, इससे पहले भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने बड़ा बयान दिया है।

पूनिया के इस बयान के बाद सियासी गलियारों में नई अटकलें लगाई जाने लगी हैं। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि सचिन पायलट मुख्यमंत्री बन सकते हैं।

पायलट को तय करना है उनका अगला कदम क्या होगा

सतीश पूनिया का कहना है कि अगर प्रदेश में परिस्थितियां बनती हैं, तो सचिन पायलट भी राजस्थान के मुख्यमंत्री बन सकते हैं।

एक न्यूज एजेंसी को दिए गए इंटरव्यू में पूनिया ने कहा, “यदि हालात अनुमति देते हैं तो सचिन पायलट मुख्यमंत्री बन सकते हैं। वास्तव में, उन्होंने इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। मामला फिलहाल कोर्ट में और इसलिए आगे किसी तरह की टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। सबसे पहले, यह सचिन पायलट को तय करना है कि उनका अगला कदम क्या होगा और उसके बाद फिर हम विचार करेंगे।”

कांग्रेस को आरोप लगाने के बजाए अपना घर संभालना चाहिए

कांग्रेस की ओर से लगातार आरोप लगाया जा रहा है कि सचिन पायलट और भारतीय जनता पार्टी मिलकर गहलोत सरकार को गिराना चाहते हैं। दूसरी ओर सचिन पायलट की ओर से कहा जा रहा है कि वह अभी भी कांग्रेस पार्टी में हैं और पार्टी के अंदर रहकर ही अपनी लड़ाई लड़ेंगे।

इस बात का जवाब देते हुए उन्होंने आगे कहा कि पायलट राष्ट्रीय नेता हैं कांग्रेस को भाजपा पर आरोप लगाने के बजाए अपना घर संभालना चाहिए। सचिन पायलट पिछले डेढ़ वर्ष से प्रदेश के उप मुख्यमंत्री थे। वह पिछले छह वर्ष से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी थे। ऐसे में भाजपा पर उन्हें संरक्षण देने का आरोप क्यों लगाया जा रहा है।

हाईकोर्ट ने स्पीकर के नोटिस पर स्टे लगा दिया है

राजस्थान हाईकोर्ट ने सचिन पायलट गुट को बड़ी राहत देते हुए स्पीकर के नोटिस पर स्टे लगा दिया है। स्पीकर ने दल बदल कानून के तहत नोटिस दिया था।

राजस्थान में सियासी संकट के बीच राजस्थान हाइकोर्ट से कांग्रेस के बागी नेता सचिन पायलट को राहत मिली है। पायलट खेमे की याचिका को सही मानते हुए हाइकोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष(स्पीकर) की ओर से जारी नोटिस को खारिज कर दिया है।

इसका मतलब ये हुआ कि अब विधानसभा स्पीकर पायलट और 18 अन्य बागी विधायकों को अयोग्य करार नहीं दे पाएंगे।

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