बहन भारत में कोमा से जूझ रही थी लेकिन इस महिला ने किया ऑस्ट्रेलिया के लोगों की मदद का फैसला

विभव देव शुक्ला

बीते कुछ दिन ऑस्ट्रेलिया के लिए बहुत अच्छे नहीं रहे, जंगलों में लगी आग से भारी तबाही हुई। अनुमानित तौर पर पूरे ऑस्ट्रेलिया में लगभग 500 करोड़ जानवरों ने अपनी जान गंवाई। हालात बहुत बेहतर नहीं हैं पर सुधर ज़रूर रहे हैं। बहुत से लोग इन हालातों से निपटने के लिए आगे भी आ रहे हैं, जिसमें खिलाड़ियों से लेकर फिल्मी सितारे तक शामिल हैं।

राहत कार्य में शामिल लोगों की मदद
फिलहाल आग से प्रभावित लोगों की मदद के लिए सिक्ख समुदाय आगे आ रहा है। आम तौर पर सिक्ख समुदाय ऐसे कार्यों के चलते खबरों में रहता ही है। ऑस्ट्रेलिया में सिक्ख समुदाय के तमाम लोग आग से प्रभावित लोगों, आग बुझाने वाले कर्मचारियों और राहत कार्य में शामिल लोगों के लिए खाने और ज़रूरत की तमाम चीज़ें उपलब्ध करा रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया के दो राज्यों न्यू साउथ वेल्स और विक्टोरिया के सिक्ख मदद के लिए सबसे ज़्यादा आगे आए। यहाँ तक कि इन राज्यों के गुरुद्वारे और होटलों से लोगों के लिए खाने का इंतज़ाम किया जा रहा है। मदद की इस पहल में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हैं जो अकेले ही अपने संसाधनों से लोगों की मदद कर रहे हैं।

भोर से लेकर रात 11 बजे तक बनाती हैं खाना
35 साल की सुखविंदर कौर लगभग 10 साल बाद भारत आने वाली थीं। लेकिन जब उन्हें पता चला कि उनके समुदाय के लोग ऑस्ट्रेलिया में आग से प्रभावित लोगों की मदद कर रहे हैं तब उन्होंने अपनी यात्रा की योजना खारिज कर दी। अब वह आग से प्रभावित लोगों के लिए खुद खाना बना रही हैं। इन बातों के अलावा हैरानी वाली एक बात यह भी है कि उनकी बहन को स्ट्रोक का अटैक हुआ था।
जिसकी वजह से उनकी बहन कोमा में थी लेकिन इसके बावजूद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में रुक कर प्रभावित लोगों की मदद करने का फैसला लिया। सुखविंदर भोर से खाना बनाना शुरू करती हैं और रात 11 बजे तक ऐसे लोगों के लिए खाना बनाती हैं जिन्हें आग की वजह से अपना घर छोड़ना पड़ा और अब उनके पास कोई चारा नहीं बचा था।

लोगों को अपना मान कर की मदद
एक समाचार समूह से बात करते हुए सुखविंदर ने कहा मैं अपनी बहन से मिलने भारत जाना चाहती थी जो स्ट्रोक आने के चलते फिलहाल कोमा में है। लेकिन फिर इतनी बड़ी घटना हो गई, मुझे समझ आया कि हमारे आस-पास रहने वालों के प्रति ज़िम्मेदारी है। हम यहाँ सालों से रह रहे हैं इसलिए हमारी ज़िम्मेदारी बनती है कि हम अपने लोगों की मदद करें। अगर मैं यहाँ के लोगों को ऐसे हालातों में छोड़ कर जाती हूँ तो मैं खुद को इंसान नहीं कह पाऊँगी। सुखविंदर ऑस्ट्रेलिया के एक सिक्ख सामाजिक समूह का हिस्सा हैं ‘सिक्ख वॉलेंटियर ऑस्ट्रेलिया।’

कई सिक्ख संगठन आगे आए
इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया में सिक्खों के ऐसे तमाम सामाजिक संगठन हैं जिन्होंने आगे के दौरान लोगों की भरपूर मदद की। इस सूची में ऑस्ट्रेलिया सिक्ख सपोर्ट, ऑस्ट्रेलिया सिक्ख वॉलेंटियर, यूनाइटेड सिक्ख, टरबंस फॉर ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया सिक्ख सपोर्ट के मनप्रीत सिंह सपरा ने कहा ऐसे महान देश की मदद करना खुद में शानदार अनुभव था। ऑस्ट्रेलिया के लोगों में भाईचारा खूब देखने मिलता है, ईश्वर इन लोगों पर अपना आशीर्वाद बनाए रखे।

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