सोनिया ने कहा देश की रीढ़ की हड्डी श्रमिक व कामगार हैं अब इनके टिकट का खर्च कांग्रेस उठाएगी

नेहा श्रीवास्तव, इंदौर।  

कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ जारी लड़ाई में लागू किए गए लॉकडाउन की वजह से मजदूर लंबे वक्त से फंसे हुए थे। अब जब करीब एक महीने बाद उन्हें घर जाने की इजाजत मिली, तो केंद्र सरकार ने रेल किराये का सारा खर्च मजदूरों से वसूलने का फैसला लिया। जो मजदूर अपने घर भागने को मजबूर हैं क्योंकि उनके पास खाने, कमाने का कोई जरिया नहीं है लेकिन सरकार फिर भी उनसे किराया वसूल रही है।

दरअसल देश के विभिन्न राज्यों में फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्य वापस भेजने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं लेकिन इसके लिए उन्हें किराया चुकाना पड़ रहा है। जिसपर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को बयान जारी कर सरकार पर निशाना साधा।

अपने जारी बयान में क्या कहा सोनिया गांधी ने

सोमवार को जारी किए गए एक बयान में कहा गया है कि सिर्फ चार घंटे के नोटिस पर लॉकडाउन लागू होने की वजह से देश के मजदूर अपने घर वापस जाने से वंचित रह गए। 1947 के बाद देश ने पहली बार इस तरह का मंजर देखा जब लाखों मजदूर पैदल ही हजारों किमी। चलकर घर जा रहे हैं।

उनका कहना है कि विदेश में फंसे भारतीयों को मुफ्त में वापस लाया गया जबकि कामगारों से किराया वसूला जा रहा है। ऐसे में उन्होंने फैसला लिया है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की हर इकाई हर जरूरतमंद श्रमिक और कामगार के घर लौटने की रेल यात्रा का टिकट खर्च वहन करेगी और जरूरी कदम उठाएगी।

कांग्रेस अध्यक्षा ने बयान जारी करते हुए कहा, “श्रमिक व कामगार देश की रीढ़ की हड्डी हैं। उनकी मेहनत और कुर्बानी राष्ट्र निर्माण की नींव है। सिर्फ चार घंटे के नोटिस पर लॉकडाऊन करने के कारण लाखों श्रमिक व कामगार घर वापस लौटने से वंचित हो गए। 1947 के बंटवारे के बाद देश ने पहली बार यह दिल दहलाने वाला मंजर देखा कि हजारों श्रमिक व कामगार सैकड़ों किलोमीटर पैदल चल घर वापसी के लिए मजबूर हो गए।”

उन्होंने कहा, ‘न राशन, न पैसा, न दवाई, न साधन, पर केवल अपने परिवार के पास वापस गांव पहुंचने की लगन। उनकी व्यथा सोचकर ही हर मन कांपा और फिर उनके दृढ़ निश्चय और संकल्प को हर भारतीय ने सराहा भी। पर देश और सरकार का कर्तव्य क्या है? आज भी लाखों श्रमिक व कामगार पूरे देश के अलग अलग कोनों से घर वापस जाना चाहते हैं, पर न साधन है, और न पैसा।’

मजदूरों से 50 रुपए अधिक लिए गए

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से घर जा रहे मजदूरों से 50 रुपए ज्यादा किराया लिया जा रहा है। शनिवार को भिवंडी से गोरखपुर तक चली श्रमिक स्पेशल ट्रेन में हर यात्री के 800 रुपए लिए गए जबकि वास्तविक किराया 745 रुपए ही था।

सोनिया गांधी ने कहा, “श्रमिक व कामगार राष्ट्रनिर्माण के दूत हैं। जब हम विदेशों में फंसे भारतीयों को अपना कर्तव्य समझकर हवाई जहाजों से निशुल्क वापस लेकर आ सकते हैं, जब हम गुजरात के केवल एक कार्यक्रम में सरकारी खजाने से 100 करोड़ रु. ट्रांसपोर्ट व भोजन इत्यादि पर खर्च कर सकते हैं, जब रेल मंत्रालय प्रधानमंत्री के कोरोना फंड में 151 करोड़ रु. दे सकता है, तो फिर तरक्की के इन ध्वजवाहकों को आपदा की इस घड़ी में निशुल्क रेल यात्रा की सुविधा क्यों नहीं दे सकते?”

अभी तक नहीं आई है रेलवे से कोई सफाई

मजदूरों से किराया वसूलने पर रेलवे की ओर से कोई सफाई नहीं आई है। अधिकारियों ने इतना कहा था कि राज्यों को किराया देने में कोई आपत्ति नहीं है, झारखंड समेत कुछ राज्य तो एडवांस पेमेंट कर चुके हैं। गुजरात ने एक एनजीओ को किराया देने के लिए तैयार किया है।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने मेहनतकश श्रमिकों व कामगारों की इस निशुल्क रेलयात्रा की मांग को बार बार उठाया है। दुर्भाग्य से न सरकार ने एक सुनी और न ही रेल मंत्रालय ने। इसलिए, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने यह निर्णय लिया है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की हर इकाई हर जरूरतमंद श्रमिक व कामगार के घर लौटने की रेल यात्रा का टिकट खर्च वहन करेगी व इस बारे जरूरी कदम उठाएगी। मेहनतकशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने के मानव सेवा के इस संकल्प में कांग्रेस का यह योगदान होगा।

लॉकडाउन के पहले फेज से ही ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं। प्रवासी मजदूर हजारों किलोमीटर का सफर पैदल या फिर साइकिल से तय कर एक से दूसरे राज्य जा रहे हैं। इस दौरान कुछ मजदूरों की मौत भी घटनाएं भी सामने आयी हैं।

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