माओवादियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्य चलाएंगे संयुक्त अभियान

रायपुर : छत्तीसगढ़ पुलिस पड़ोसी राज्यों के साथ सुरक्षा बलों और आम जनता के लिए अंतरराज्यीय सीमाओं को सुगम बनाने के लिए नक्सल विरोधी संयुक्त अभियान चलाएगी. राज्य के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि माओवाद प्रभावित राज्यों से लगने वाले वन क्षेत्रों को माओवादी अपने छुपने और सप्लाई चेन के लिए इस्तेमाल करते हैं जिसे संयुक्त ऑपरेशन से रोका जाएगा.

दिप्रिंट को मिली जानकारी के अनुसार 12 अक्टूबर को हुई आठ राज्यों के पुलिस महानिदेशकों और वरिष्ठ अधिकारियों की वर्चुअल बैठक में माओवादियों के विरुद्ध संयुक्त आपरेशन के लिए एक वृहद साझा कार्यक्रम जल्द तैयार करने का निर्णय लिया गया है. कार्यक्रम का फोकस एरिया छ्त्तीसगढ़ होगा और इसमें भाग मुख्यतः प्रदेश से लगने वाले चार राज्यों ओडिशा, तेलंगाना, झारखंड और महाराष्ट्र के पुलिस दस्ते लेंगे. अभियान में बाद में इन राज्यों के नक्सल विरोधी विशेष सशस्त्र बल ऑफेंसिव आपरेशन में भाग लेंगे.

राज्य के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि माओवादियों के विरुद्ध संयुक्त रणनीति का खुलासा नहीं किया जा सकता. लेकिन उन्होंने यह माना कि यह एक बड़ा अभियान रहेगा, जिसमें नक्सलियों को चौतरफा घेरने की तैयारी होगी. साहू ने दिप्रिंट को बताया कि, ‘माओवादियों के खिलाफ संयुक्त अभियान को लेकर निर्णय ले लिया गया है. लेकिन उसकी बारीकियां अभी तय नही हुई हैं. अभियान में नक्सलियों को कई मोर्चों पर घेरने की तैयारी रहेगी. केंद्रीय गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से परामर्श करके पूरा मसौदा तैयार किया जाएगा.’

हालांकि, अधिकारियों ने स्ट्रेटेजिक कारणों से कार्यक्रम की पूरी जानकारी साझा नहीं किया है. लेकिन उनका कहना है बैठक का एजेंडा छ्त्तीसगढ़ पुलिस के पहल पर ही तैयार किया गया था. इसमें निर्णय लिया गया है कि नक्सल विरोधी संयुक्त अभियान में ऐसे अंतर्राज्यीय वन क्षेत्र चिन्हित किये जाएंगे जहां नक्सली अपने लिए समय समय पर पनाहगाह बनाते हैं और जो पड़ोसी राज्यों से विस्फोटक और रसद सामग्री की सप्लाई के गुप्त रास्ते हैं. एक वरिष्ट पुलिस अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया कि छ्त्तीसगढ़ से लगने वाले महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड और तेलंगाना बॉर्डर में ऐसे कई ग्रे क्षेत्रों हैं जिनका इस्तेमाल नक्सली अपनी सहूलियतों के लिए करते हैं. इस अधिकारी के अनुसार इसका मुख्य कारण छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों के इन वनक्षेत्रों में सुरक्षाबलों की अनुपस्थिति है.

बस्तर आईजी पी सुंदरराज ने बताया कि, ‘नक्सल विरोधी अंतर्राज्यीय संयुक्त अभियान पहले भी चलाया गया है. हालांकि इस बार राज्यों के बीच ग्रे वनक्षेत्र को चिन्हित कर वहां सुरक्षाबलों की उपस्थिति और आम नागरिकों के लिए परिवहन की सुविधा के लिए प्रोजेक्ट तैयार करना है. इन ग्रे क्षेत्रों में नदियों और पहाड़ जैसे प्राकृतिक बैरियर होने के कारण नक्सली अक्सर फायदा उठाते हैं. उनसे मिलनेवालों पर नजर, उनकी मेडिकल, विस्फोटक पदार्थ और खाद्य सामग्री की सप्लाई चैन को काटना है. ये ज्यादातर महाराष्ट्र, तेलंगाना, झारखंड, ओडिशा और मध्यप्रदेश से लगने वाले घने वन हैं. वहां स्थान चिन्हित कर सुरक्षाबलों के कैम्प स्थापित करना एक अहम कार्य होगा.’

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सुन्दराज के अनुसार छ्त्तीसगढ़ के सुकमा जिला-ओडिशा बॉर्डर में शबरी नदी और बीजापुर-महाराष्ट्र बॉर्डर में इंद्रावती नदी के कछार से लगते जंगलों का नक्सलियों ने अपने फायदे के लिए भरपूर दोहन किया है. पिछले दो तीन सालों में दोनों नदियों में ब्रिज का निर्माण हुआ लेकिन पुलिस और सुरक्षाबलों की उपस्थिति नहीं हो पाई है जिसका फायदा नक्सली अभी भी उठा रहे हैं. आम जनता के आने जाने और उनके बीच सांस्कृतिक गतिविधियां बढ़ाने का काम भी कार्यक्रम का हिस्सा बनेगा. पुलिस अफसरों का कहना है कि आम जनता की जितनी आवाजाही बढ़ेगी नक्सलियों के लिए वह जगह उतनी ही असुरक्षित होगी. इसके चलते ही ओडिशा बॉर्डर के पास गुप्तेश्वर मंदिर का विस्तार और सुविधा जनक बनाया गया है.

स्पेशल फोर्सेस का इस्तेमाल भी होगा

बस्तर आईजी ने बताया, ‘अंतर्राज्यीय स्पेशल नक्सल फोर्सेस के इस्तेमाल का भी संयुक्त आपरेशन का भाग होगा लेकिन वह अंतिम ऑप्शन होगा. संयुक्त आपरेशन में छत्तीसगढ़ की कोबरा (कमांडो बटालियन फार रिसोल्यूट एक्शन) और डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिज़र्व गार्ड), महाराष्ट्र की सी-60(कमांडो-60), ओडिशा की एसओजी और तेलंगाना के ग्रेहाउंड संयुक्त आपरेशन में हिस्सा लेंगे. हालांकि आईजी के मुताबिक इन माओवादी विरोधी विशेष सुरक्षा दस्तों के इस्तेमाल का एक्शन प्लान तैयार करने में समय लगेगा.

उठ रहा है सवाल

नक्सलियों के खिलाफ सरकार भले ही संयुक्त आपरेशन का कार्यक्रम बना रही है. लेकिन वहीं कुछ अधिकारियों ने इसपर प्रश्न भी उठा रहें हैं. सार्वजनिक तौर पर नही लेकिन अनौपचारिक बातचीत में एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने बताया कि नक्सल विरोधी अभियान में राज्य और केंद्रीय सशत्रबलों को मिलाकर करीब 80 हजार सुरक्षाबल मौजूद हैं. ऐसे में किसी ऑफेंसिव आपरेशन के लिए अन्य राज्यों के फोर्सेस की आवश्यकता नही पड़नी चाहिए. हमारे पास करीब 20 हजार कोबरा और डीआरजी हैं जो नक्सल विरोधी आपरेशन के विशेषज्ञ फोर्स है.’

एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार 2018 में भी दो संयुक्त आपरेशन हुए थे जिसमें ग्रेहाउंड ने करीब 20 नक्सलियों को मारा था लेकिन इसमें काफी जटिलताओं का सामना करना पड़ा था.

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