लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों के बीच होगी खुश रहने की पढ़ाई

विभव देव शुक्ला

हमारे देश में शिक्षा को लेकर अक्सर नए प्रयोग होते रहते हैं और ऐसे प्रयोगों के चर्चे भी खूब होते हैं। कभी इन प्रयोगों के लिए लोगों का रवैया सकारात्मक रहता है तो कभी ज़रा कम सकारात्मक रहता है। ऐसा ही एक अलग प्रयोग उत्तर प्रदेश की राजधानी स्थित लखनऊ विश्वविद्यालय में हुआ है। विश्वविद्यालय के एमएड (मास्टर ऑफ एजुकेशन) पाठ्यक्रम में ‘एजुकेशन फॉर हैप्पीनेस’ (प्रसन्नता के लिए शिक्षा) शामिल किया गया है।

खुशियों के पहलुओं की पढ़ाई
इसे अगले शैक्षणिक सत्र से एमएड पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। हैप्पीनेस फॉर एजुकेशन को पाठ्यक्रम में शामिल करने की सबसे बड़ी वजह है छात्रों को खुशियों के तमाम पहलुओं से रूबरू कराना। लखनऊ विश्वविद्यालय की प्राध्यापक अमिता वाजपेयी ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए इस बारे में जानकारी दी।
उन्होंने कहा यह पूरी तरह वैकल्पिक होगा और एमएड में शामिल किया जाएगा। इसे परास्नातक में पढ़ने वाला कोई भी छात्र चुन सकता है और अगले साल एकेडमिक काउंसिल से आज्ञा मिलने के बाद इसे पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।

अभी से हो रहा है चर्चा
इसके बाद अमिता जी ने कहा पढ़ने वाले छात्र गलत जगहों में अपनी खुशी तलाशते हैं, खुशी के प्रति उनका नज़रिया ही गलत है। असल में खुशी उनके भीतर है लेकिन वह दुनिया में खुशी तलाशते हैं और हम उन्हें असल खुशी से रूबरू कराना चाहते हैं। छात्रों के लिए यह समझना ज़रूरी है कि भारत में इसकी सूरत कैसी है और यही वजह है कि भले इसे शुरू होने में समय है लेकिन अभी से ही इसकी चर्चा शुरू हो चुकी है।

दिल्ली के विद्यालय से हुई पहल
हम भले ऐसा सोचते हैं कि एक शिक्षित आदमी का जीवन अशिक्षित आदमी के जीवन से बेहतर है लेकिन असलियत कुछ और ही है। एक व्यक्ति जितना ज़्यादा शिक्षित है उसके ज़ेहन में उतने ही उतार चढ़ाव जारी रहते हैं। इस पाठ्यक्रम के बाद छात्रों में बदलाव ज़रूर नज़र आएगा।
अंत में अमिता जी ने कहा हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पत्नी मेलानिया ट्रम्प दिल्ली के एक सरकारी विद्यालय गई थीं जहाँ उन्होंने पढ़ने वाले बच्चों के साथ खुश रहने का अभ्यास किया। मैंने उस विद्यालय के बारे में पढ़ा था, वहाँ बच्चे खुश रहने का अभ्यास करते हैं और खुश रहते भी हैं।

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